अलीगढ़ 07 जनवरी। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत कराई गई नसबंदी के मामलों में बड़ी लापरवाही सामने आई है। वर्ष 2024 और 2025 के दौरान नसबंदी कराने के बावजूद 64 महिलाएं गर्भवती हो गईं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और नसबंदी की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग की ओर से गर्भवती महिलाओं को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू की गई, हालांकि नियमों के उल्लंघन के चलते 8 महिलाओं के दावे खारिज कर दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, नसबंदी के बाद गर्भवती होने पर महिला को करीब 60 हजार रुपये तक का मुआवजा दिया जाता है, ताकि वह बच्चे के भरण-पोषण में इसका उपयोग कर सके। लेकिन इसके लिए यह अनिवार्य है कि गर्भधारण की सूचना 90 दिनों के भीतर विभाग को दी जाए। तय समय सीमा के बाद आवेदन करने पर मुआवजा स्वीकृत नहीं किया जाता।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, नसबंदी फेल होने के 64 मामलों में से 62 मामलों में मुआवजा राशि प्राप्त हो चुकी है, जबकि 6 ब्लॉकों से आए 8 मामलों को नियमानुसार खारिज कर दिया गया। इन निरस्त मामलों में लोधा और छर्रा ब्लॉक से दो-दो, जबकि अकराबाद, जवां, टप्पल और गोंडा से एक-एक मामला शामिल है।
परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि भी तय की गई है। महिला नसबंदी पर 2000 रुपये, प्रसव के बाद नसबंदी पर 3000 रुपये और पुरुष नसबंदी पर 3000 रुपये दिए जाते हैं। इसके बावजूद पुरुष नसबंदी की संख्या बेहद कम बनी हुई है।
अलीगढ़ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नीरज त्यागी ने बताया कि जिले में वर्ष 2024–25 के दौरान कुल 64 नसबंदी फेलियर के मामले सामने आए हैं। 90 दिन की समय सीमा के बाद सूचना देने के कारण 8 मामलों को स्वीकार नहीं किया जा सका। उन्होंने बताया कि इस अवधि में जिले में 4 हजार से अधिक महिलाओं की नसबंदी कराई गई है।

