रामपुर 16 जुलाई। रामपुर विकास प्राधिकरण ने समाजवादी पार्टी के नेता आजम खां के ड्रीम प्रोजेक्ट मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए परिसर में बने 38 भवनों के ध्वस्तीकरण का अंतिम आदेश जारी कर दिया है। प्राधिकरण ने इन भवनों को बिना मानचित्र स्वीकृत कराए निर्मित मानते हुए पूरी तरह अवैध घोषित किया है।
बुधवार को व्यक्तिगत सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरडीए के उपाध्यक्ष अजय कुमार द्विवेदी ने जौहर ट्रस्ट और विश्वविद्यालय प्रबंधन को अवैध निर्माण स्वयं हटाने के लिए 20 दिन का समय दिया है। इसके बाद आरडीए कभी भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर सकेगा। इस मामले में आरडीए के क्षेत्रीय अवर अभियंता ने 28 जून को वाद दर्ज कराया था। इसके बाद मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के सचिव व विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को नोटिस जारी कर 8 जुलाई तक सभी 38 भवनों के स्वीकृत मानचित्र, संबंधित अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। इसमें 15 जुलाई को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका दिया गया था। इसी क्रम में विश्वविद्यालय और रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारी और अधिवक्ता बुधवार को उपस्थित हुए। विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से जवाब दाखिल करने के बाद व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया।
इस सुनवाई के लिए विश्वविद्यालय के डिप्टी रजिस्ट्रार, अधिवक्ता तथा कुछ प्रतिनिधि आरडीए के वीसी की भूमिका निभा रहे डीएम के समक्ष पेश हुए थे। इनके जवाब और तर्कों को संतोषजनक न मानते हुए वीसी/डीएम ने 38 भवनों को अवैध निर्माण बताते हुए ध्वस्त करने का आदेश पारित कर दिया। इस कार्रवाई के बाद कुल 40 भवनों वाले विश्वविद्यालय में सिर्फ मेडिकल भवन और अकादमिक ब्लॉक ही बचेंगे।
डीएम के मुताबिक सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से तर्क दिया गया कि विश्वविद्यालय सींगनखेड़ा गांव की भूमि पर बना है। 27 सितंबर-2024 से पहले आरडीए के विकास क्षेत्र में सींगनखेड़ा गांव शामिल नहीं था। इसलिए आरडीए से नक्शा स्वीकृत कराने की आवश्यकता नहीं थी। यह क्षेत्र नगर पालिका में भी नहीं था। निर्माण काफी पहले का है, जिसे वर्तमान नियमों के आधार पर अवैध नहीं माना जा सकता।
विश्वविद्यालय पक्ष की इन दलीलों को आरडीए ने स्वीकार नहीं किया। यह माना गया कि भले ही यह स्थान आरडीए या नगर पालिका क्षेत्र में शामिल नहीं था लेकिन मेडिकल भवन और अकादमिक ब्लॉक के भवन का मानचित्र जिला पंचायत से पास कराया गया है, तो शेष 38 भवनों का मानचित्र स्वीकृत क्यों नहीं कराया गया। दो भवनों का मानचित्र स्वीकृत कराने से यह भी साबित होता है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन को नियमों की जानकारी थी। इसी आधार पर बिना मानचित्र स्वीकृत कराए बने 38 भवनों को अवैध निर्माण मानते हुए उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा-27(1) के तहत प्रदत्त अधिकारों व प्रावधानों के अंतर्गत इनके ध्वस्तीकरण का आदेश पारित किया जा रहा है।
आदेश में कहा गया है कि प्रतिवादीगण इस अवैध निर्माण को 20 दिनों के अंदर स्वयं हटाकर इस कार्यालय को सूचित करें, अन्यथा आरडीए द्वारा निर्धारित अवधि के बाद ध्वस्त कराया जाएगा। इस स्थिति में ध्वस्तीकरण पर होने वाला समस्त व्यय उक्त अधिनियम की धारा 40 के तहत भू-राजस्व बकाया की तरह वसूल किया जाएगा।

