नई दिल्ली 04 अप्रैल। भारतीय मूल की नन्ही शतरंज खिलाड़ी बोधना शिवानंदन ने इतिहास रच दिया है। अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ (फिडे) की नवीनतम रेटिंग सूची के अनुसार 11 साल की बोधना इंग्लैंड की शीर्ष महिला खिलाड़ी बन गई हैं।
यह किसी फिल्मी कहानी जैसी लगती है। जिस बैग को उनके पिता फेंकने जा रहे थे, उसी में से बोधना को पुराना शतरंज को बोर्ड मिला और शुरू हो गई सफलता की एक नई कहानी। वह कहानी आज यहां तक पहुंच गई है कि इस 11 वर्षीय खिलाड़ी ने 2366 रेटिंग अंक हासिल कर लिए हैं। बोधना का नाम पिछले साल तब सुर्खियों में आया जब उन्होंने यूनान में आयोजित यूरोपियन क्लब कप में पूर्व महिला चैंपियन यूक्रेन की ग्रैंड मास्टर मारिया मुजिचुक को शिकस्त दे दी।
25 वर्षीय लैन को पछाड़ा
उत्तरी लंदन में रहने वाली प्राथमिक विद्यालय की छात्रा बोधना ने फिडे की सूची में चार बार की ब्रिटिश महिला चैंपियन 25 वर्षीय लैन याओ को पीछे छोड़कर इंग्लैंड के खिलाड़ियों में शीर्ष स्थान हासिल किया। इसके साथ ही वह पहली बार विश्व की शीर्ष 100 महिला खिलाड़ियों में भी शामिल हो गई हैं। वह अभी 72वें स्थान पर हैं।
इस 11 वर्षीय खिलाड़ी के माता-पिता 2007 में तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली से इंग्लैंड चले गए थे। बोधना का जन्म 7 मार्च, 2015 को लंदन में हुआ था। पांच साल की उम्र में जब कोविड-19 में लॉकडाउन के दौरान उनके पिता एक बैग को फेंकना चाह रह थे। पर उसमें शतरंज का बोर्ड और सेट मिलने के बाद बोधना में इस खेल प्रति जुनून पैदा हो गया।
बोधना छोटे से करियर में ही कई रिकॉर्ड तोड़ चुकी हैं। 2024 में वह शतंरज ओलंपियाड में उतर किसी भी खेल में इंग्लैंड के प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बन गई थीं। फिर पिछले साल ब्रिटिश चैंपियनशिप में 60 साल की ग्रैंड मास्टर को हराने वाली सबसे युवा खिलाड़ी बनी थीं।
पूर्व प्रधानमंत्री सुनक ने भी सराहा
भारतीय मूल के पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने शिवानंदन को देश की शीर्ष महिला खिलाड़ी बनने पर बधाई दी है। साथ ही उन्होंने उस समय को याद किया जब उन्होंने अपने सरकारी आवास पर उनके साथ एक मैच खेला था। सुनक ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बोधना के साथ अपनी एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, केवल 11 साल की उम्र में इंग्लैंड की शीर्ष महिला शतरंज खिलाड़ी बनने पर बोधना शिवानंदन को बहुत-बहुत बधाई। हम एक बार डाउनिंग स्ट्रीट गार्डन में एक-दूसरे के खिलाफ खेले थे। उनकी सफलता कोई हैरानी की बात नहीं है।

