नई दिल्ली, 24 जून (ता)। अमेरिका और ईरान में शांति समझौता होने के साथ ही होर्मुज जल मार्ग के हालात काफी तेजी से सामान्य होने लगे हैं। 17 जून, 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता करने की सहमति बनी और उसके बाद से अभी तक होर्मुज जलमार्ग से 11 जहाज भारत की तरफ रवाना हो चुके हैं। वैसे अभी भी 10 भारतीय जहाज होर्मुज में हैं लेकिन वह भी जल्द ही भारत की ओर निकल सकते हैं।
इन जहाजों में काफी सारा कच्चा तेल और उर्वरक है। इनके भारत के विभिन्न बंदरगाहों पर पहुंचने के साथ ही देश में पेट्रोलियम उत्पादों व उर्वरकों की उपलब्धता बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी। यह जानकारी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने दी है।
जायसवाल ने बताया कि होर्मुज से जहाज बाहर निकलने लगे हैं और साथ ही तीन भारतीय जहाज बाहर से होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में भी गये हैं। वहां से 11 जहाज भारत की तरफ आने के लिए निकल चुके हैं।
इनमें तीन भारतीय जहाज हैं जिनमें 2.85 लाख मैट्रिक टन कच्चा तेल भरा हुआ है जबकि विदेशों में पंजीकृत एक एलपीजी और एक कच्चे तेल से भरा जहाज भी भारत आ रहा है। छह जहाजों मे उर्वरक हैं जो भारत आ रहे हैं।
पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के समय (फरवरी-मार्च 2026) होर्मुज क्षेत्र में लगभग 24 भारतीय जहाज फंसे हुए थे, जिनमें ज्यादातर जहाज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में थे। इनमें मुख्य रूप से कच्चा तेल, एलपीजी और उर्वरक ले जा रहे टैंकर शामिल थे।
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 50 फीसद होर्मुज जलमार्ग के रास्ते आयात करता है (मध्य पूर्व के देशों जैसे इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत से)। हाल के वर्षों में भारत ने आयात स्रोतों में विविधता लाकर इस निर्भरता को कम किया है, लेकिन होर्मुज अभी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग बना हुआ है।
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