Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • अंडर-19 विश्वकप जीतने के लिए वैभव सूर्यवंशी और टीम को बधाई
    • डिजिटल ठगी में 25 हजार का मुआवजा ऊंट के मुंह में जीरा भी नहीं, रिजर्व बैंक के अफसर मुंह बंद करने की बजाय ठोस उपाय ढूंढे
    • पीएम मोदी के गुरुमंत्र को आत्मसात करें छात्र, अंकों के पीछे ना भागकर खुद को जीवन की कसौटी पर कसें अभिभावक
    • भारत का देसी एआई 22 भाषाओं में बोलेगा, इसी महीने आएगा टेक्स्ट वर्जन
    • करीना कपूर एलओसी कारगिल फिल्म के सीन को याद कर भावुक हुईं
    • प्रयागराज के IVF सेंटर पर सौदा, नाबालिग को शादीशुदा बताकर एग्स निकलवाने वाली 4 महिलाओं समेत 5 गिरफ्तार
    • पेराई क्षमता बढ़ी बागपत चीनी मिल की
    • बीड़ी के धुएं ने रोक दी मथुरा में ट्रेन
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»देश»असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, गरीबों को बजट से थी बहुत आशाएं, मीडिया को तो पूरी तौर पर किया नजरअंदाज
    देश

    असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, गरीबों को बजट से थी बहुत आशाएं, मीडिया को तो पूरी तौर पर किया नजरअंदाज

    adminBy adminFebruary 2, 2026No Comments12 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मल सीतारमण ने गत दिवस बजट पेश किया। सत्ता समर्थक इसे उपलब्धियों से परिपूर्ण मान रहे हैं और विपक्ष जनता को मायूस करने वाला बता रहे हैं। एक बात जरुर है कि पूरी मेहनत के बाद कुछ समय उपरांत कई विधानसभाओं के होने वाले चुनावों को देखते हुए यह बजट तैयार हुआ होगा और कुछ तो इसमें आम आदमी के हित में होगा इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता। यह भी सही है कि यह दुनिया की बड़ी आबादी वाले देश का बजट है। आम आदमी घर के चार लोगों को पूरी तरह संतुष्ट नहीं पाता तो फिर हर व्यक्ति को संतुष्टि मिले यह संभव नहीं है। व्यापारी नौकरीपेशा को जो उम्मीदें थी वो पूरी नहीं हो पाई हैं क्योंकि जितना लोकलुभावना बजट होना चाहिए था वो नजर नहीं आता है। अगर ध्यान से देखें तो बजट में समाज के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया के लिए कोई रियायत या बढ़ावा देने की खबर पढ़ने को नहीं मिली। एक बात कही जा सकती है कि देश के लघु भाषाई समाचार पत्र संचालकों को पूरी तौर पर नजरअंदाज इस बजट मं किया गया। इसे पेश करते समय जिम्मेदार यह भी भूल गए कि पीएम मोदी गरीबी दूर करने हर आदमी को स्वालंबी बनाने व्यापार को बढ़ावा देने की कोशिश करते रहे हैं।
    लघु भाषा मीडिया को निराश किया
    मीडिया के क्षेत्र में लघु समाचार पत्रों केलिए कुछ ना किया जाने को यह कह सकते हैं कि सरकार इन्हें धीरे धीरे शायद समाप्त करना चाहती है क्योंकि पिछले कुछ सालों में इस श्रेणी के समाचार पत्र देश में बंद हो चुके हैं और विभागीय मंत्री को पता हो या ना कुछ अधिकारी इन्हें समाप्त करने का षडयंत्र भी कर रहे हैँ क्योंकि विज्ञापन के नाम पर इन्हें कुछ नहीं दिया जा रहा मगर उत्पीड़न के लिए कोई कसर आरएनआई डीएवीपी और सूचना विभाग के अधिकारी नहीं छोड़ रहे हैं। वित्तमंत्री निर्मल सीतारमण ने टैक्स के खौफ से आजादी को बढ़ाते हुए गलती पर जेल नहीं जुर्माना तकनीकी चोरी नहीं की जो व्यवस्था की है उससे यह दर्शाने की कोशिश हुई कि अपने तो अपने होते हैं उनके बारे में तो हम सोचे ही रहे हैं। जानकारें कह रहे हैँ कि उत्पादकता से आय बढ़ेगी। पशुधन के माध्यम से गांव में सर्मृिद्ध बढ़ेगी। यूपी को रफ्तार देंगे दो हाईस्पीड ट्रेन कॉरिडोर। यूपी में उद्योगों को संजीवनी मिलेगी और शहर चमकेंगे। कनेक्टीविटी बढ़ेगी। बड़े शहरों की सूरत बदलेगी। पीएम मोदी का कहना है कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की पहुंच सरकार का लक्ष्य है। बजट १४० करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं का प्रतीक है। वित्तमंत्री निर्मल सीतारमण का कहना है कि समृद्ध भारत के लिए सधे कदमों का बजट है मगर किसान कह रहा है कि उसे निराशा हुई है। यह जरुर है कैंसर सहित अन्य बीमारियेां की दवाओं की कीमतों में कमी को सराहनीय कह सकते हैँ। लेकिन सरकार गरीबों की समस्याओं असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को ध्यान में रखकर बजट बनाती तो यह मोदी सरकार का बजट यादगार हो सकता था।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

    sampadkiya tazza khabar tazza khabar in hindi
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    admin

    Related Posts

    अंडर-19 विश्वकप जीतने के लिए वैभव सूर्यवंशी और टीम को बधाई

    February 7, 2026

    डिजिटल ठगी में 25 हजार का मुआवजा ऊंट के मुंह में जीरा भी नहीं, रिजर्व बैंक के अफसर मुंह बंद करने की बजाय ठोस उपाय ढूंढे

    February 7, 2026

    पीएम मोदी के गुरुमंत्र को आत्मसात करें छात्र, अंकों के पीछे ना भागकर खुद को जीवन की कसौटी पर कसें अभिभावक

    February 7, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.