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    Home»देश»चाइनीज मांझे की बिक्री रोकने में थानेदार असफल क्यों? इस पर प्रतिबंध ही इसके प्रचलन का माध्यम
    देश

    चाइनीज मांझे की बिक्री रोकने में थानेदार असफल क्यों? इस पर प्रतिबंध ही इसके प्रचलन का माध्यम

    adminBy adminJanuary 14, 2026No Comments15 Views
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    वैसे तो अब देश में कहीं ना कहीं पतंग उड़ाने का प्रचलन शुरू हो गया है। रंग बिरंगी उड़ती पतंगे मन को खुश करती है। जब पीएम नरेंद्र मोदी विदेशी मेहमान के साथ पतंग उड़ाने का मजा लेने से नहीं चूके तो आम आदमी की बात ही क्या है। पतंग उड़ाकर मनोरंजन करना सैंकड़ो साल से चला आ रहा है। कभी कागज में डोर बांधकर पतंग उड़ाई जाती थी तो अब महंगा मांझा होने के बाद भी इसके प्रचलन में बढ़ोत्तरी हो गई है। यह शौक किसी से कहने से नहीं छुटता। कुल मिलाकर कहने का आश्य है कि पतंग हमारी परंपराओं और आत्मा से जुड़ा मनोरंजन है। लेकिन कुछ सालों से चाइनीज मांझा उपयोग होने की बात काफी खतरनाक होती जा रही है। यह जानलेवा और घायल करने वाला मांझा कब प्रचलन में यह तो नहीं कहा जा सकता लेकिन यह कहने में कोई हर्ज नहीं हो रहा है हर साल कुछ की मौत का कारण यह बनता हो तो कोई बड़ी बात नहीं है। जैसे जैसे इसका प्रचलन बढ़ रहा है इसे रोकने के भी प्रयास हो रहे हैं लेकिन यह बढ़ता ही जा रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि बाइक चलाते समय हेलमेट लगाएं और गले में कपड़ा बांधे। चाइनीज मांझे की बिक्री और प्रयोग रोकने के लिए पुलिस को सूचना दें। कहीं पड़ा मिले तो डस्टबिन में डाल दें या जला दें। दूसरेां को यह सुझाव देने में यह बातें अच्छी लगती हैं लेकिन प्रैक्टिल में यह संभव नहीं है। मेरा मानना हे कि इस पर पूर्ण रोक लगे और इसे बेचना दंडनीय अपराध बनाया जाए।
    इस मांझे की बिक्री पर रोक लगाने की जिम्मेदारी पुलिस को भी सौंपी गई है लेकिन वो अपने इस काम को अंजाम देने में सफल नहीं है। दूसरे दृष्टिकोण से देखें तो अपराध रोकने का दावा करने वाले पुलिसकर्मियों के लिए चाइनीच मांझे की बिक्री ना रोक पाना अच्छी बात नहीं है। पतंग मांझा हर थाना क्षेत्र में कुछ ही जगह बिकता है। अगर थानेदार चाइनीज मांझे की बिक्री का पता नहीं लगा सकते तो वह अपराध कैसे रोकते होंगे। इसका अंदाजा पुलिस अधिकारी और जनता दोनों कर लगा सकते हैं।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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