केरल में एक कार्यक्रम में मणिशंकर अय्यर ने कहा कि यहां कांग्रेस नहीं जीतेगी क्योंकि उसके नेता कम्यूनिस्टों से कम आपस में ज्यादा लड़ते हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के लिए कुछ भी हो मैं नेहरुवादी, राजीवगांधी वादी हो सकता हूं मगर राहुल वादी नहीं। मणिशंकर अय्यर हमेशा अपने बयानों के लिए चर्चाओं में रहते हैं। उनके इस बयान से पार्टी के नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा कि यह उनकी निजी राय है पार्टी का हिस्सा नहीं। पवन खेड़ा ने कहा कि मणिशंकर अय्यर पार्टी में नहीं है ऐसे में उन पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। अब अगर पवन खेड़ा की बात सही है तो मणिशंकर अय्यर के बयान का कोई मतलब नहीं है। अगर वो सोचते हैं कि वह अभी भी कांग्रेसी है तो पार्टी नेता का नेतृत्व सबको मानना होता है। तो मणिशंकर अय्यर इससे कैसे अलग हो सकते हैं।
दो दशक पहले मेरठ से लखनऊ जा रहा था। हापुड़ से निकलते ही एक महिला अपनी बर्थ पर किसी को देखकर बोली कि यह मेरी सीट है आप उठिए तो वह व्यक्ति पैर सिकोड़कर बोला कि बैठ जाइये। महिला ने विरोध किया तो बोला कि ट्रेन में सफर करना है तो हमें झेलना ही होगा। कहने का मतलब है कि जो पार्टी में सर्वेसर्वा है उसकी बात तो माननी पड़ती है। राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता है। मणिशंकर अय्यर के बयान के बाद कांग्रेस नेताओं के अनुसार मणिशंकर अय्यर जी आप अगला चुनाव लड़कर देखिए तो आपको राहुल गांधी के व्यक्तित्व केबारे में समझ आ जाएगा क्योंकि पाटी नेता कार्यकर्ता के वो लीडर हैं और अपने लोगों को कम या ज्यादा जिताकर लाने में सफल है। कुछ प्रदेश में अकेले तो कुछ में सहयेागी के रुप में कांग्रेस का हस्तक्षेप चल रहा है लेकिन मणिशंकर अय्यर जी आप कहां है। कांग्रेसियों का कहना है कि आपके बयान से कोई फर्क नहीं पड़ता।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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