अभी तक आयकर आदि के पड़ने वाले छापों को लेकर विपक्षी दल और पीड़ित के समर्थक ही आरोप प्रत्यारोप किया करते थे। इस मामले में भी बसपा सुप्रीमो और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती जी द्वारा बसपा के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह के ठिकानों पर मारे गए छापों की निंदा करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया गया है। और अन्य विपक्षी दलों ने भी इस कार्रवाई की निंदा की है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि पहली बार प्रदेश सरकार के किसी मंत्री द्वारा ऐसी कार्रवाई का विरोध किया गया है। योगी आदित्यनाथ की सरकार में शामिल दिनेश प्रताप सिंह ने उमाशंकर सिंह के यहां पड़े छापों पर बिफरते हुए कहा कि एक बीमार व्यक्ति को ऐसी कार्रवाई कर परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि कौन संवेदनहीन राजनेता या संस्था हो सकती है जो ऐसी परिस्थितियों में पीड़ा देने की सोचती है। भले ही मंत्री दिनेश प्रताप सिंह उमाशंकर सिंह के रिश्ते में समधी लगते हो लेकिन खुलकर ऐसे मामलों में बोलने का यह मामला किसी भाजपा नेता और सरकार में मंत्री का शायद पहला ही है। दूसरी तरफ सूत्रों के अनुसार बसपा विधायक की एक पुरानी फर्म छात्र शक्ति इंफ्राकंस्ट्रक्शन व ओमसाई से संबंधित कुछ दस्तावेजों में अनियामितताओं की शिकायत के बाद यह कार्रवाई शुरु हुई। सही गलत क्या है यह देखना सरकार और जिम्मेदारों का काम है। मगर एक तरफ बसपा विधायक पर कार्रवाई का मंत्री द्वारा विरोध और दूसरी तरफ मेरठ के सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों द्वारा अपने प्रतिष्ठानों पर सपा के झंडे लगाए जाने का प्रकरण और ऐसे ही और मुददे हो सकते हैं। जिनकी ओर ध्यान देकर भाजपा हाईकमान और सरकार को कुछ ऐसे सकारात्मक निर्णय लेने चाहिए जिससे यह जो असंतोष किसी भी कारण से क्यों ना हो उत्पन्न हो रहा है वो रुक सके। यह किसी को बताने की आवश्यकता नहीं है कि अगर कहीं से चिंगारी उठती है या धुआं निकलता है तो कुछ ना कुछ तो उसके पीछे होगा ही। वो क्या हे उसका पता कर भाजपा नेतृत्व को अपनी पार्टी में उत्पन्न असंतोष का सभी पक्षाों से बातचीत कर समाधान ढूंढा जाना आवश्यक है। यह भी जरुरी है कि मेरठ के शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों के संग जो हो रहा है उसमें अदालत के निर्देश पर कार्रवाई तो होगी ही मगर व्यापारियों को जो लग रहा है कि सत्ताधारी दल भाजपा उनकी दुख की घड़ी में साथ नहीं है तो यह भावना आगामी विधानसभा चुनाव में कई प्रकार के नए समीकरण को जोर दे सकती है क्योंकि भाजपा का समर्थन किए जाने के बावजूद जो यह सपा के झंडे लगाए गए वो कोई अच्छे समय के सूचक नहीं कह सकते। वैसे भी राजनीतिक दलों के नेताओं कार्यकर्ताओं को पीड़ित के र्सािन में खड़ा होना चाहिए। सरकार व अदालत को जो करना है वो करेंगे ही बस किसी को यह ना लगे कि मरे साथ कोई नहीं है जबकि मैं हमेशा इनके साथ खड़ा रहा।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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