नई दिल्ली, जनवरी 29। पीएफआरडीए ने एनपीएस स्वास्थ्य पेंशन योजना को एक अलग स्वास्थ्य आधारित योजना के रूप में तैयार किया है। असल में इसका मकसद यह है कि रिटायरमेंट से पहले या बाद में जब भी इलाज के लिए जरूरत पड़े, अंशधारक को कर्ज लेने, बीमा क्लेम के चक्कर या रिश्तेदारों पर निर्भर न रहना पड़े। इस योजना के जरिये वह अपने ही पेंशन फंड से इलाज का खर्च निकाल सकता है। इस योजना में कोई भी अपनी मर्जी से शामिल हो सकता है। इसकी शर्त बस इतनी है कि उसके पास पहले से एनपीएस का खाता होना चाहिए। वैसे सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों के कर्मचारी, स्वरोजगार करने वाले लोग और रिटायरमेंट की योजना बना रहे निवेशक सब इसके दायरे में आते हैं। इसमें योगदान की राशि भी अंशधारक अपनी क्षमता के अनुसार तय कर सकता है, ठीक वैसे ही जैसे सामान्य एनपीएस में किया जाता है। साल 2004 में रिटायरमेंट कॉर्पस तैयार करने के लिए शुरू हुए नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस में अब निवेशकों को इलाज की सुविधा देने का भी प्रावधान किया गया है। पेंशन नियामक संस्था पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने एनपीएस स्वास्थ्य पेंशन योजना नाम से नई पहल शुरू की है। इसका मकसद लोगों को उनकी पेंशन बचत के जरिये चिकित्सा खर्चों को पूरा करने में मदद करना है। फिलहाल इसे एक छोटे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में एक विशेष सैंडबॉक्स सिस्टम में टेस्ट किया जा रहा है।
यह योजना स्वास्थ्य खर्चों को नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) से जोड़ती है। लोग इसमें पैसे बचा सकते हैं और बाद में अस्पताल या डॉक्टर के बिलों के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। इसका मकसद भारतीय नागरिकों के लिए स्वास्थ्य देखभाल को आसान, सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। पीएफआरडीए ने 27 जनवरी 2026 को सर्कुलर जारी कर बताया कि एनपीएस स्वास्थ्य पेंशन योजना को एनपीएस के तहत एक विशेष सेक्टर योजना के रूप में शुरू किया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल आउट-पेशेंट और इन-पेशेंट चिकित्सा खर्चों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है, जो मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (एमएसएफ) के तहत होगी।
यह योजना एक योगदान आधारित पेंशन योजना होगी, जो पीएफआरडीए एक्ट की धारा 12(1)(ं) और धारा 20 के प्रावधानों के तहत संचालित होगी और इसे भारत के नागरिकों को स्वैच्छिक रूप से उपलब्ध कराया जाएगा। यह योजना पेंशन फंड्स (‘पीएफ्स’) प्राधिकरण की पूर्व मंजूरी के बाद, केवल प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट के रूप में सीमित अवधि के लिए शुरू की जाएगी। यह रेगुलेटरी सैंडबॉक्स फ्रेमवर्क के तहत नियंत्रित वातावरण में संचालित होगी।. पीएफ्स फिनटेक्स और अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर इस प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट को लागू कर सकते हैं। इस प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट के लिए, पीएफआरडीए (एनपीएस के तहत निकासी और बाहर निकलने) विनियम, 2015 के प्रावधानों को रेगुलेटरी सैंडबॉक्स फ्रेमवर्क के तहत तैयार किया गया है।
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