Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • आज से शुरू हुई जनगणना, मोबाइल से खुद भर सकेंगे जानकारी, 22 मई से घर-घर पहुंचेंगे प्रगणक
    • भारत में Acer का नया टैबलेट हुआ लॉन्च, कीमत- 25,499 रुपये
    • सदाशिव ध्यूंसर महादेव मंदिर में पांडवों ने गुजारा था कुछ समय
    • वंदे मातरम का अपमान दंडनीय अपराध राष्ट्रगीत और गान व प्रार्थना का विरोध क्यों ?
    • पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था की कमर ऑपरेशन सिंदूर ने तोड़ी
    • आयुष्मान सुविधा है जरुरी, फर्जी भुगतान लेने वालों की निगरानी जरुरी; पात्रों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी अस्पतालों में दी जाएं ज्यादा सुविधाएं
    • 1 मिनट में बुक होंगे 1.5 लाख तत्काल टिकट
    • उम्रकैद काट रहे हिन्दू कैदी और मुस्लिम डिप्टी जेलर बने जीवनसाथी
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»देश»सदाशिव ध्यूंसर महादेव मंदिर में पांडवों ने गुजारा था कुछ समय
    देश

    सदाशिव ध्यूंसर महादेव मंदिर में पांडवों ने गुजारा था कुछ समय

    adminBy adminMay 7, 2026No Comments2 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    ऊना, 07 मई (ता)। हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना के समस्त क्षेत्र को प्रकृति ने अपार सौंदर्य से संवारा ही नहीं, बल्कि यहां के लोगों ने भी वास्तुकला की विलक्षण शैलियों द्वारा मंदिरों का निर्माण कर ऊना जनपथ को अद्भुत समृद्ध संस्कृति से सराबोर कर रखा है। यहां के विविध भागों में अनेक देवी-देवताओं के मंदिर विद्यमान हैं। यह सभी धार्मिक स्थल जहां अति पूजनीय हैं, वहीं लोगों की श्रद्धा, आस्था और विश्वास के प्रतिबिंब भी हैं। यानी प्रत्येक की अपनी ही महत्ता तथा विशेषता है। इन मंदिरों में वर्षभर अनेक धार्मिक आयोजन होते रहते हैं। ऊना के अलग-अलग शोभा वाले अनेक मंदिरों में से एक है सदाशिव ध्यूंसर महादेव मंदिर, जोकि ऊना-अंब राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे बडूही मार्ग से मात्र 12 किमी. की दूरी पर तलमेहड़ा बही ग्रामीण क्षेत्र की पर्वतीय भाग की तलहटी के हरे-भरे जंगल के मध्य अवस्थित है, जिसकी नक्काशी को देखकर लोग अचंभित हो जाते हैं।
    वैसे भी भोलेनाथ अनंत और सर्वव्यापक हैं। किंवदंतियों अनुसार यह मंदिर लगभग 5500 वर्ष से भी अधिक पुराना है। प्राचीन सदाशिव ध्यूंसर मंदिर धार्मिक दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व रखता है। किंवदंतियों के अनुसार इस स्थान पर पांडवों ने अपने अज्ञातवास का कुछ समय गुजारा था, जिसके प्रमाण प्रत्यक्ष रूप में सुरंगों, गुफा, कुंड, बावड़ीयों आदि के रूप में मिलते हैं। जनश्रुति अनुसार पांडवों के पुरोहित धौम्य ऋषि ने अपनी तीर्थ यात्रा के दौरान शिव की घोर आराधना की थी। भोलेनाथ ने उनकी इस तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें मनवांछित वर मांगने को कहा। ऋषि धौम्य ने भोलेनाथ से कहा कि कोई भी व्यक्ति इस स्थान पर उनके द्वारा पूजित शिवलिंग की पूर्ण आस्था के साथ आराधना करेगा, तो वे मनवांछित फल प्राप्त करेगा। भोलेनाथ ने उनकी प्रार्थना को शिरोधार्य कर तथास्तु कहा। एक अन्य जनश्रुति अनुसार इस स्थान व प्राचीन शिवलिंग की खोज स्वामी ओंकारानंद गिरि महाराज 1008 ने की थी। उन्होंने यहां पहुंचकर मंदिर की पुनस्र्थापना की।
    मंदिर निर्माण के दौरान खुदाई में यहां कई मूर्तियां तथा कलश चक्र आदि मिले थे। लोग इन्हें पांडवों द्वारा निर्मित मानते हैं। वैसे भी यह समस्त तलहटी शिवलिंग के आकार रूप लिए हुए है। मंदिर के भीतर अवस्थित अलौकिक व भव्य शिवलिंग के दर्शन किए जा सकते हैं, जो एक अनोखा अलौकिक शिवलिंग प्रतीत होता है। इस शिवलिंग के समक्ष समस्त श्रद्धालु नतमस्तक हो जाते हैं। मान्यता है कि जो भी भक्त हृदय तल से पूजा करे, तो उनकी सभी मनवांछित मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। श्रावण मास के दौरान यह मंदिर प्रतिदिन बारिश की बूंदों की फुहारों से अटा रहता है। श्रावण मास के हर सोमवार को देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं की कतारबद्ध पंक्तियों में खड़े भक्तों के उमड़ते महासैलाब के नजारे दिव्यता की अनुभूति प्रदान करते हैं। इस दौरान भक्तजन श्रद्धा विभोर होकर शिव स्तुति में लीन हो जाते हैं एवं भगवान शिव की बड़ी आस्था से आराधना करते देखे जा सकते हैं। भक्तजन शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर बिल्व पत्र, दूर्वा, तिल, चावल, दूध व जल चढ़ाकर अपनी असीम श्रद्धा प्रकट करते हैं और भजन कीर्तन द्वारा शिव की स्तुति कर समस्त क्षेत्र को शिवमय से गुंजायमान कर देते हैं। उस समय ऐसा लगता है कि जैसे भोलेनाथ की कृपा अपरंपार यहां बरस रही है। शिवरात्रि, भाद्र मास में यहां मेले का आयोजन किया जाता है, जिसका स्थानीय लोगों के अलावा दूरदराज से आए लोग भरपूर आनंद उठाते हैं। यहां ठहरने के लिए सभी सुविधाओं से सुसज्जित धर्मशाला भी है और प्रतिदिन मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए लंगर की भी उचित व्यवस्था है। मंदिर के समीप ही प्राकृतिक जल स्रोत की अनेक बावड़ी भी है, जिनमें कुदरती निकलती निर्मल जल धारा सभी को आकर्षित करती है।

    Desh Religion tazza khabar tazza khabar in hindi The Pandavas spent some time at the Sadashiv Dhyunsar Mahadev Temple. Una
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    admin

    Related Posts

    आज से शुरू हुई जनगणना, मोबाइल से खुद भर सकेंगे जानकारी, 22 मई से घर-घर पहुंचेंगे प्रगणक

    May 7, 2026

    भारत में Acer का नया टैबलेट हुआ लॉन्च, कीमत- 25,499 रुपये

    May 7, 2026

    वंदे मातरम का अपमान दंडनीय अपराध राष्ट्रगीत और गान व प्रार्थना का विरोध क्यों ?

    May 7, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.