फिल्म केडी द डेविल के गाने सरके चुनर और टटीरी आदि को लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा संजय दत्त एवं नोरा फतेही सहित पांच लोगों को आयोग के समक्ष २४ मार्च को तथा टटीरी के लिए बादशाह समेत ४ लोगों को २५ मार्च को पेश होने के लिए कहा गया हैं। आरोप है कि इन गानों से यौन उत्तेजक आपत्तिजनक एवं भारतीय संहिता आईटी एक्ट, पाक्सो एक्ट के प्रावधानों का उल्लेघन हो रहा है। २४ की दोपहर १२रू३० बजे इससे जुड़े दस्तावेजों के साथ पेश होने और ना होने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही हो सकती है जैसी खबर पढ़ने को मिली और यह जानकार अच्छा लगा कि राज्य महिला आयोग ने इन मामलों में संज्ञान लिया और उत्तेजकता फैलाने को गलत माना। मुझे लगता है कि केन्द्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की आंखे भी इस प्रकरण से खुलनी चाहिए क्योंकि वर्तमान में जो वेब सीरीज और फिल्में बन रहीं है उनमें से कुछ अश्लीलता कामुकता उत्तेजना हिंसा और नग्नता को बढ़ावा देने के साथ साथ भारतीय संस्कृति और परंपरा के विरूद्ध जाकर इन फिल्मों और वेब सीरीजों को कैसे अनुमति मिल रही है देखा जाना चाहिए। यह सही है कि भारतीय संस्कृति और हमारे लोक गीतों से थोड़ा अलग हटकर यह दोनों गाने बने जो नहीं बनने चाहिए थे मगर कुछ अभिनेत्री और अभिनेता जो राष्ट्रीय पुरस्कारों से भी सम्मानित हो चुके हैं उनमें से कई बिकनी या उत्तेजनात्मक कपड़ों पहनकर जो व्यवस्था और नियमों का उल्लेघन किया जा रहा है वह सबसे ज्यादा उत्तेजना और कामुकता फैलाने से इंकार नहहीं किया जा सकता और उन्हें देखकर जो अश्लील कमेंट कुछ लोगों द्वारा किये जाते हैं वह चाहे अकेले में ही किये जाते हों लेकिन उनसे वासना की बढ़ती प्रवृत्ति से इंकार नहीं किया जा सकता। मेरा मानना है कि राष्ट्रीय महिला आयोग के निर्णय को आत्मसात कर केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय और फिल्म सेंसर बोर्ड ऐसी फिल्म ओर गानों पर तो रोक लगाये ही जो महिला हो या पुरूष अभिनेता और अभिनेत्री सीन की मांग बताकर अर्धनग्न वस्त्र पहन कामुकता का प्रदर्शन करते हों उन पर रोक तो लगाई ही जाये भविष्य में इन्हें कोई सम्मान और पुरस्कार न दिया जाये यह भी सुनिश्चित किया जाये क्योंकि इससे हमारी भावी पीढ़ी पर गलत असर पड़ता है और नौजवानों की कामुक भावनाओं में उबाल आने की मंशा से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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