Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • बूमर और जेन-जी मिलकर काम करें तो विकास होगा : राजनाथ
    • वृंदावन के केसी घाट के पास नाव पलटने से 10 लोगों की जान गई
    • एआईएमआईएम ने हुमायूं कबीर से नाता तोड़ा, बंगाल चुनाव अकेले लड़ेगी
    • जिला कारागार में बंदी ने खुद को आग लगाकर दी जान, तीन निलंबित
    • श्रीनगर के रघुनाथ मंदिर में 36 साल बाद आस्था की घंटियां
    • बैसाखी उत्साह एवं बलिदान का त्योहार
    • नोएडा में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 450 विदेशी लोगों से ठगे 8 करोड़, 16 गिरफ्तार
    • विद्या बालन ऐसी अभिनेत्री है जो हर भाषा में रचती हैं जादू
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»देश»सरकार और निर्माणकर्ता असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को दे मुआवजा लेकिन एफआईआर उचित नहीं
    देश

    सरकार और निर्माणकर्ता असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को दे मुआवजा लेकिन एफआईआर उचित नहीं

    adminBy adminApril 9, 2026No Comments6 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    पुताई करते हुए नीचे गिरने से मजदूर की हुई मौत, मकान स्वामी पर दर्ज हुआ मुकदमा असंगठित क्षेत्रों के मजदूरों पर पहले ही कम समस्याएं नहीं है। आठ घंटे की मेहनत के बाद भी सही खानपान की सुविधा नहीं मिल पाती। कभी काम मिलता है कभी नहीं। मजदूरी के स्थान से घर तक आने जाने में दो घंटे लगते है। इससे कह सकते हैं कि १२ घंटे में इतना ही मिलता है जितना पेट भर खाने को मिल जाए। असंगठित क्षेत्र के मजजूरों के लिए सरकार कुछ आर्थिक सहायता दे जिससे उसके परिवार में खाना ना मिलने की नौबत ना आ पाए।
    लेकिन ३५ वर्षीय मनीष की नीचे गिरने से मौत हुई परिवार के लिए इससे बड़ा दुख कुछ नहीं हो सकता। जीवनभर उसकी याद में मां बाप और परिवार को तड़पना पड़ेगा यह भी सत्य है। यह भी सही है कि हादसा होने पर मकान मालिकों को जेल भेजा जाने लगा तो भूखमरी और काम ना मिलने का जो माहौल होगा उससे कई समस्याएं खड़ी हो सकती है क्योंकि निर्माणकर्ता जानबूझकर किसी भी कर्मचारी को नुकसान नहीं पहु़ंचाना चाहता। इससे तो उसे ही परेशानियेां का सामना करना पड़ेगा। कई जगह ठेकेदारों के आदमी काम करते हैं। जिनका मकान मालिकों से कोई मतलब नहीं होता। वो ठेकेदार से भुगतान लेते हैं और उसके निर्देशन में काम करते हैं। कुछ लोगों के इस कथन से मैं भी सहमत हूं कि ऐसे नियम बनाए जाए जिससे घर या दुकान बनाने वाले के खिलाफ एफआईआर ना हो और ऐसी घटनाओं में सरकार एकमुश्त रकम पीड़ित परिवार को दे और कुछ मुआवजा मकान मालिक से दिलाया जाए जिससे दोनों परिवार चलते रहें। क्योंकि एफआईआर होने लगी तो काम मिलना ही मुश्किल हो जाएगा और केंद्र व प्रदेश सरकार हर आदमी को काम नहीं दिला सकती। इसलिए जनहित में मजदूर के परिवार के लिए कुछ किया जाए और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को किसी भी स्थिति में भूखा मरने के लिए ना छोड़ा जाए और ना ऐसी नौबत आनी दी जाए।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

    sampadkiya tazza khabar tazza khabar in hindi
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    admin

    Related Posts

    बूमर और जेन-जी मिलकर काम करें तो विकास होगा : राजनाथ

    April 11, 2026

    वृंदावन के केसी घाट के पास नाव पलटने से 10 लोगों की जान गई

    April 11, 2026

    एआईएमआईएम ने हुमायूं कबीर से नाता तोड़ा, बंगाल चुनाव अकेले लड़ेगी

    April 11, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.