नई दिल्ली 31 मार्च। दिल्ली अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आइएफएफडी) का पांचवां दिन भारतीय सिनेमा के गौरवशाली गौरव और भविष्य के मंथन पर आधारित रहा। भारत मंडपम में आयोजित महोत्सव के समापन समारोह में सिनेमा जगत के कई दिग्गजों और बेहतरीन फिल्मों को भी सम्मान प्रदान किया गया। इस अवसर पर दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा सहित फिल्म जगत के कई अभिनेता व अभिनेत्रियां मौजूद रहे।
समापन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली इतिहास और आधुनिक आशाओं का गढ़ है। उन्होंने कहा कि इस महोत्सव के माध्यम से महिला कलाकारों और नए फिल्म निर्माताओं को दिल्ली वैश्विक मंच प्रदान करेगी। पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने दिल्ली को फिल्म शूटिंग और पर्यटन के लिए अंतरराष्ट्रीय गंतव्य बनाने का संकल्प दोहराया। दिग्गजों का सम्मान और सिनेमाई यादें महोत्सव में भारतीय सिनेमा के मील के पत्थर श्शोलेश् के 50 वर्ष पूरे होने पर दिग्गज निर्देशक रमेश सिप्पी को उनके अमूल्य योगदान के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया। वहीं, ग्रैमी विजेता रिकी केज की संगीतमय प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। दिग्गज फिल्म निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने कहा कि आइएफएफडी केवल फिल्मों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि उन मानवीय भावनाओं और संवादों का उत्सव है, जो सिनेमा जगाता है।
पुरस्कारों की झड़ी और भविष्य का सिनेमा
इस वर्ष की पुरस्कार श्रेणियों में यश राज फिल्म्स की सैयाराश् को पाथब्रेकिंग फिल्म आफ द इयरश् चुना गया, जबकि सितारे जमीन परश् को सबसे प्रेरणादायक फिल्म का खिताब मिला। अभिनय के क्षेत्र में रणवीर सिंह ने श्सर्वश्रेष्ठ अभिनेताश् और आदित्य धर ने श्सर्वश्रेष्ठ निर्देशकश् (फिल्म धुरंधर) का पुरस्कार जीता। वहीं, अनुपम खेर को श्तन्वी द ग्रेटश् के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और शुभांगी दत्त को सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेत्री के सम्मान से नवाजा गया।
बौद्धिक विमर्श और मास्टरक्लास
ओटीटी प्लेटफार्म पर महिलाओं की भूमिका और अभिनय की बारीकियों पर गहन चर्चा हुई। दिव्या दत्ता श्रिया पिलगांवकर और भूमि पेडनेकर ने आधुनिक सिनेमा में सार्थक कहानियों के महत्व पर प्रकाश डाला। अनुपम खेर की मास्टर क्लास ने युवा कलाकारों को अनुशासन और ईमानदारी का पाठ पढ़ाया। जैसे-जैसे यह महोत्सव अपने समापन की ओर बढ़ रहा है, भारत मंडपम में दर्शकों का उत्साह चरम पर है, जो दिल्ली की इस नई फिल्म संस्कृति की सफलता की तस्दीक करता है। दिव्या दत्ता कहा कि ओटीटी ने ऐसी कहानियों के लिए जगह बनाई है जो बिल्कुल सच्ची लगती हैं और ऐसे किरदारों को सामने लाया है जो असल जिंदगी से जुड़े हुए महसूस होते हैं। भूमि पेडनेकर ने महोत्सव की बातचीत में एक बेबाक और जमीनी आवाज जोड़ी और फिल्म स्कूल से निकाले जाने से लेकर यश राज फिल्म में कास्टिंग असिस्टेंट के तौर पर शुरुआत करने तक के अपने अनोखे सफर पर बात की।

