नई दिल्ली, 17 फरवरी। सुंदरवन की घनी झाड़ियों और दलदली जमीनों पर बसने वाले परिवारों के लिए रात का सन्नाटा टाइगर के खौफ का पर्याय है। दक्षिण 24 परगना के गांवों में एक दहाड़ से दहशत का माहौल बन जाता है। लेकिन, अब इन सहमी हुई बस्तियों में ‘स्मार्ट बिजूका’ के रूप में उम्मीद की किरण जगी है। 024 में अब तक करीब 15 बार टाइगर जंगल से निकलकर बस्तियों में घुसे हैं, जबकि पिछले साल यह गिनती सिर्फ 2 थी। भारतीय सुंदरवन में टाइगर की तादाद अब 101 के करीब पहुंच गई है, जो इस इलाके की वहन क्षमता के करीब है। जगह की कमी के कारण टाइगर शिकार की तलाश में अक्सर गांवों का रुख करते हैं।
क्या है यह स्मार्ट बिजूका?
इंसानों-जानवरों के टकराव को टालने के लिए वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) और वन विभाग ने ‘एएनआईडीईआरएस (एनिमल इंट्रूज़न डिटेक्शन एंड रिपेलेंट सिस्टम) तकनीक पेश की है। यह सोलर पावर से चलने वाला एक संवेदनशील डिवाइस है। इसके इन्फ्रारेड सेंसर 30 मीटर के दायरे में किसी भी बड़े जानवर की दस्तक को पहचान लेते हैं और तुरंत तेज फ्लैश लाइट के साथ डरावने अलार्म बजाने लगते हैं। इस अचानक हुए शोर और रोशनी से टाइगर सहमकर बिना किसी को नुकसान पहुंचाए वापस जंगल लौट जाता है। यह तकनीक बिना जानवर को जख्मी किए इंसानी जिंदगियों को महफूज रख रही है, जो सुंदरवन के लोगों के लिए किसी रक्षक से कम नहीं है।
जैसे ही कोई टाइगर गांव के करीब आएगा, यह स्मार्ट डिवाइस तेज रोशनी और डरावनी आवाजों से उसे बिना चोट पहुंचाए वापस जंगल की ओर मोड़ देगा
सोलर पावर से चलने वाले इस सिस्टम और एआई कैमरों की मदद से अब न किसी की जान जाएगी और न ही किसी घर में दहशत होगी
डिवाइस लगाने का काम ज़ोरों पर
दक्षिण 24 परगना की डीएफओ निशा गोस्वामी का कहना है कि रायदिघी रेज के कुलतली ब्लॉक में, जहां टाइगरों के आने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है, वहा हीरोभंगा इलाके में चार ऐसे डिवाइस लगा दिए गए हैं। जल्द ही चार और लगाए जाएंगे।
एआई कैमरों से नजर
डब्ल्यूआईआई के फील्ड ऑफिसर सम्राट पॉल ने बताया कि इन डिवाइसेस के साथ एआई कैमरे भी लगाए जाएंगे। इससे वन विभाग को तुरंत अलर्ट भी मिलेगा और टाइगर की तस्वीरें भी कैद हो सकेंगी। यह तकनीक इंसान और जानवर दोनों को सुरक्षित रखने का आसान तरीका है।
यह तकनीक नई नहीं है। अभिषेक घोषाल ने बताया कि यूपी के पीलीभीत और कतर्नियाघाट में जहां ‘गन्ने के खेतों वाले बाघ’ बड़ी समस्या थे, वहां भी इन डिवाइसेस ने बहुत अच्छा काम किया है। अब देखना यह है कि सुंदरवन के दलदली और मैग्रोव वाले माहौल में यह कितना कारगर होता है।
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