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    Home»देश»जिसके अंतिम संस्कार की चल रही थी तैयारी गढ्डें में एम्बुलेंस के झटके से ब्रेनडेड महिला की चलने लगी सांसे
    देश

    जिसके अंतिम संस्कार की चल रही थी तैयारी गढ्डें में एम्बुलेंस के झटके से ब्रेनडेड महिला की चलने लगी सांसे

    adminBy adminMarch 12, 2026No Comments25 Views
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    परिवार द्वारा अंतिम संस्कार की तैयारी जिस महिला को ब्रेनडेड घोषित की गयी 50 वर्षीय राष्ट्रीय राजमार्ग 74 पर हाफिजगंज के पास सड़क में गड्ढे में एम्बुलेंस का झटका लगने से महिला को होश आ गया। डाक्टर इसे इलाज का परिणाम बताते हैं तो कुछ लोग भगवान की मर्जी और वो तो है ही महिला चाहे किसी भी रूप में ठीक हुई हो। एक खबर के अनुसार पिछले महीने 22 फरवरी को पीलीभीत जिले निवासी एक अदालत में वरिष्ठ सहायक के तौर पर कार्यरत विनीता शुक्ला 50 वर्षीय को घर में काम करते समय बेहोश हो गयी थी उनके पति कुलदीप शुक्ला के अनुसार उनकी पत्नि को पहले उच्च रक्तचाप की शिकायत रही है जिसकी उन्होंने दवा ली थी। बीते 22 फरवरी को वह अचानक बेहोश हो गयी जिन्हें पीलीभीत के मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। गम्भीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बरेली रेफर कर दिया गया जहां एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। तीन दिन तक वेन्टीलेटर पर रहने के बाद डाक्टरों ने बताया कि उनके बचने की उम्मीद कम है और उन्हें रेफरल नोट देकर छुट्टी दे दी गयी। इस संदर्भ में कुलदीप शुक्ला का कहना है कि 24 फरवरी को अपनी पत्नि को घर वापस ला रहे थे रिश्तेदारों को अंतिम संस्कार करने की तैयारी हेतु पहले ही बता दिया था। उन्होंने मीडिया को बताया कि हाफिजगंज के पास एम्बुलेंस अचानक एक बड़े गढ्डे में जा घुसी और जोर से झटका लगने पर मेरी पत्नि ने तुरंत सही तरीके से सांस लेना शुरू कर दिया तब हमने अंतिम संस्कार की तैयारी करने से मना कर दिया। इस संदर्भ में डाक्टर राकेश सिंह का कहना है कि जब उन्हें उनके पास लाया गया तो वह बेहोश थी ओर उनकी सांसें धीरे-धीरे चल रही थी। और हम शरीर पर एक निशान देखकर किसी जानवर या सांप के काटे का ईलाज कर रहे थे।
    अब जो भी हो यह तो पक्का है कि भगवान की मेहरबानी से विनीता शुक्ला बच गयीं और यह भी कमाल है कि जब अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी तब सड़क का एक गढ्डा जिसके लिए हम जिम्मेदारों को निरंतर कोशते हैं वह वरदान बन गया। जिसे देखकर यह कह सकते हैं एक ग्रामीण कहावत जिसको राखे सांइया मार सके ना कोई। 50 वर्षीय विनीता शुक्ला पर सही उतरती है। अभी तक एक चर्चा बहुत सुनी जाती थी कि फलानी सड़क पर एक गर्भवती महिला को रिक्शा में बैठाकर ले जाया जाये तो वहां के गढ्डों में उसका बिना डाक्टर के ही प्रसव हो सकता है उसमें अब यह और किंवदन्ती जुड़ सकती है कि फलां सड़क पर हुए गढ्डों में अगर ब्रेनडेड घोषित व्यक्ति को ले जाया जाये तो वह भी भगवान की मर्जी से सही हो सकता है।
    (प्रस्तुतिः- अंकित बिश्नोई राष्ट्रीय महामंत्री सोशल मीडिया एसोसिएशन एसएमए व पूर्व सदस्य मजीठिया बोर्ड यूपी संपादक पत्रकार)

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