आज से 11 साल पहले 22 जनवरी को देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की प्रेरणा से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत हुई थी। आधा गिलास भरा है या खाली वाली निगेटिव पृष्ठभूमि छोड़ दे तो बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं का नारा खूब गूंजा और देश में इस नारे की गूंज और इससे प्रेरित कार्य को आगे बढ़ाने का काम चलता रहा। २०१५ को शुरु हुई यह योजना काफी सफल रही इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता। पीएम मोदी का यह कहना है कि यह गर्व की बात है कि आज भारत की बेटियां हर क्षेत्र में नए रिकॉर्ड बना रही हैं। पीएम ने एक्स पर लिखा कि कन्या को लक्ष्मी मानने वाले देश में ११ साल पहले आज के दिन बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं की शुरुआत हुई थी। उक्त अभियान सफल है। लेकिन वर्तमान समय में अभी जो मंशा इस अभियान के शुरुआत में पीएम की थी उसे पूरा करने में सबको प्रयास करना होगा। साक्षरता को बढ़ावा देने के साथ यह भी देखना होगा कि कुछ राज्यों में महिलाओ की संख्या पुरुषों के मुकाबले कम क्यो हो रही हैं। मैंने लिखा था कि मतदाता सर्वेक्षण के दौरान मायके से बेटी का नाम काट दिया जाता है लेकिन ससुराल में नाम नहीं जोड़ा जाता। सरकार ससुराल में मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए फार्म उपलब्ध कराए और बेटियों को बढ़ावा देने वाली योजनाओं को बढ़ावा दें और जागरूकता अभियान शुरु हो जिससे गरीब परिवार भी जान सके कि सरकार उनकी बेटियों के भविष्य को खुशहाल बनाने के लिए क्या कर रही है। एक बात हमें समझनी होगी कि शिक्षित बेटियां खुशहाली का संदेश है और वो कई परिवारों की खुशहाली को बढ़ावा देने का माध्यम बनकर सामने आ रही हैं। पीएम साहब इस अभियान की सफलता और बेटियों के भविष्य को आकार देने के लिए जिलो के अधिकारियों को जवाबदेह बनाया जाए क्योंकि यह देखने को मिला है कि कुछ अधिकारी बेटियों का हक उन्हें उपलबध कराने में आनाकानी करने की भावना से ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं। इस सोच को बदले बिना बेटियों का भविष्य सुखमय होना संभव नहीं लगता है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
