नई दिल्ली 07 मार्च। लोकसभा चुनाव में मजबूत प्रत्याशी उतारकर सटीक जातिगत समीकरण साधने में सफल रहे सपा मुखिया अखिलेश यादव मिशन 2027 की तैयारी भी उसी तर्ज पर कर रहे हैं। सपा ने न सिर्फ अपनी पार्टी के मजबूत दावेदारों की तलाश शुरू की है, बल्कि गठबंधन सहयोगी कांग्रेस के साथ मिलकर भी इस रणनीति पर काम आगे बढ़ा दिया है।
कांग्रेस ने अपनी ओर से भी यह रिपोर्ट तैयार कर सपा के साथ साझा की है कि उत्तर प्रदेश के किस विधानसभा क्षेत्र में किस जाति का प्रभाव अधिक है और उस जाति वर्ग से कांग्रेस के कोटे से कौन- कौन मजबूत दावेदार हो सकते हैं। विपक्षी गठबंधन जातिगत समीकरण के इसी ब्लूप्रिंट के आधार पर अपनी चुनावी बिसात बिछाने की तैयारी में है।
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस, दोनों ही दलों की ओर से कई बार स्पष्ट किया जा चुका है कि लोकसभा चुनाव 2024 की तरह ही आगामी विस चुनाव में भी उनका गठबंधन जारी रहेगा। दोनों दलों का शीर्ष नेतृत्व भाजपा का विजय रथ रोकने के लिए इस गठबंधन को बहुत आवश्यक मान रहा है। दोनों दल इसलिए भी उत्साहित हैं, क्योंकि लोकसभा चुनाव में वह मिलकर भाजपा को पीछे धकेलने में कामयाब रहे। न सिर्फ ये विपक्षी दल, बल्कि राजनीतिक जानकार भी मानते हैं कि पिछड़ा, दलित अल्पसंख्यक (पीडीए) का नारा बुलंद करते हुए जिस तरह से अखिलेश यादव ने लोकसभा सीट के हिसाब से प्रत्याशियों के माध्यम से जातिगत समीकरण साधे, उसने भाजपा की मुट्ठी से 29 सीटें छीन लीं और वह सपा की 37 के मुकाबले मात्र 33 पर सिमट गई। वहीं, सपा के सहारे कांग्रेस को भी बढ़त मिली और उसकी सीटें एक से बढ़कर छह हो गईं। इस परिणाम से सपा-कांग्रेस जहां उत्साहित हैं, वहीं बिहार चुनाव परिणामों से सतर्क भी हैं।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि दोनों परिणामों को देखते हुए ही अब विपक्ष की तैयारी चल रही है। अव्वल तो भाजपा प्रत्याशियों के सामने जातिगत प्रभाव का आकलन करते हुए मजबूत दावेदार उतारने की रणनीति है।

