मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ द्वारा कोलकाता में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों संग बैठक के दौरान भाजपा सहित अधिकतर दलों के नेताओं ने चुनाव पश्चिम बंगाल में दो या तीन चरणों में कराने का सुझाव दिया। जबकि सत्ताधारी टीएमसी ने चुनाव के चरणों को लेकर कोई बात नहीं की। सोमवार को सीईसी ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखविंदर सिंध संधू और विवेक जोशी के साथ राज्य के निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल की पीठ ने कोलकाता में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इसे लेकर एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना था कि अधिकतर दलों ने चुनाव दो या तीन चरणों में कराने की बात की। हो सकता है कि उक्त सुझाव उनके हिसाब से सही हो मगर मुझे लगता है कि धन और जनशक्ति का समय बचाने और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए निर्वाचन का काम एक ही चरण मे हो क्योंकि एक तो जब एक साथ चुनाव होंगे तो बाहर से जाकर कुछ लोग चुनाव प्रभावित कराने के जो आरोप लगाते हैं वो खत्म होंगे क्योंकि अपने यहां चुनाव कराना पार्टी के लिए जरुरी होगा।
हमारे पास सुरक्षा बल मौजूद हैं और निर्वाचन का काम संपन्न कराने के लिए अधिकारियों व कर्मचारियों को लगाकर एक ही चरण में चुनाव कराए जा सकते हैं जिससे चुनाव परिणाम के लिए हफ्तों का इंतजार खत्म होगा और सरकार का गठन जल्दी हो सकेगा। ऐसे में चुनावी खर्च प्रत्याशियों का कम होगा और सरकारी खर्च में भी कमी आएगी। बाकी निर्वाचन आयोग को अच्छा या बुरा देखना है लेकिन मैने देखा कि जब एक साथ चुनाव होते थे तो गड़बड़ी की संभवनाएं कम होती थी। अब सरकार पर सुविधाएं बहुत है और मतदान भी ईवीएम से होता है। ऐसे में मुझे लगता है कि एक बार में चुनाव कराना कठिन काम नहीं है बस उसे लागू करने का काम करना होगा। ऐसे में जिस प्रकार से पूर्व निर्वाचन आयुक्त टीएन शेषन का नाम पूरे देश में चुनाव सुधारकर्ता के रुप में लिया जाता है वैसे ही अगर एक बार में चुनाव कराए जाते हैं तो इस निर्णय के लिए निर्वाचन आयोग की चर्चा हुआ करेंगी। हर क्षेत्र में बदलावों को अपनाना ही चाहिए।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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