नई दिल्ली 21 मार्च। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने शुक्रवार को आयकर अधिनियम, 2025 के लिए नियमों को अधिसूचित कर दिया। इसमें वेतनभोगियों के लिए मकान किराया भत्ते पर बढ़े हुए कर लाभ का प्रावधान है, लेकिन मकान मालिक-किरायेदार के संबंधों का खुलासा करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह एक अप्रैल से प्रभावी होगा।
संसद ने 12 अगस्त, 2025 को छह दशक पुराने आयकर अधिनियम, 1961 को बदलने के लिए एक नया आयकर विधेयक पारित किया था। यह कोई नई कर दर लागू नहीं करता है, बल्कि केवल भाषा को सरल बनाता है। जटिल आयकर कानूनों को समझने के लिए ऐसा करना आवश्यक था। इसमें अनावश्यक प्रावधानों और पुरानी भाषा को हटा दिया है और आयकर अधिनियम, 1961 की 819 धाराओं को घटाकर 536 और अध्यायों की संख्या 47 से घटाकर 23 कर दी है।
एकल कर वर्ष की अवधारणा लागू
नए कानून के तहत ‘कर वर्ष’ की नई अवधारणा लाई जा रही है। यह पहले इस्तेमाल होने वाले ‘पूर्व वर्ष’ और ‘कर निर्धारण वर्ष’ की व्यवस्था की जगह लेगा। बदलाव का मकसद कर प्रणाली को आसान बनाना है, ताकि आय कमाने की अवधि और उस पर कर लगाने की अवधि को एक ही शब्द में समझाया जा सके।
मकान मालिक से संबंध बताना होगा अनिवार्य
आयकर नियम वेतनभोगी करदाताओं पर लागू होने वाले मकान किराया भत्ता छूट के लिए प्रस्तावित ढांचे को बरकरार रखते हैं। नए नियमों के तहत आठ शहर – मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु – वेतन के 50 प्रतिशत की उच्च छूट सीमा के लिए पात्र होंगे, जबकि अन्य सभी स्थान 40 प्रतिशत पर बने रहेंगे।
खुलासा प्रणाली को और भी सरल बनाया गया
नए नियमों में पूंजीगत लाभ, शेयर बाजार के लेनदेन और अनिवासी कराधान के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं, जबकि अन्य खुलासा प्रणाली को सरल बनाया गया है। अधिसूचना में 150 से अधिक आधिकारिक फॉर्म पेश किए गए हैं। इसमें पैन के दोहरीकरण और प्रतिकूल ऑडिट टिप्पणी से पैदा होने वाली कर देनदारी की जांच के लिए लेखा परीक्षकों को अधिक जिम्मेदारी दी गई है।

