कांग्रेसी हो या कोई और टीपू सुल्तान की प्रशंसा करें तो किसी को भी कोई ऐतराज नहीं है लेकिन महान पराक्रमी और देशभक्तों के प्रेरणास्त्रोत शिवाजी महाराज से उनकी बराबरी किया जाना उचित नहीं है। बताते चलें कि बीते दिनों मालेगांव महानगर पालिका के मेयर के दफ्तर में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाने से शुरु हुआ विवाद धीरे धीरे जोर पकड़ रहा है। और देशभक्त चाहे भाजपा हो या कांग्रेस बसपाई हो या सपाई सबने महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष हर्षवर्द्धन के द्वारा टीपू सुल्तान की बराबरी शिवाजी महाराज से किए जाने की निंदा की जा रही है। भाजपा नेता आचार्य तुषार भोंसले ने चेतावनी दी कि यदि २४ घंटे में टीपू सुल्तान की फोटो नहीं हटाई गई तो हिंदू समाज के साथ मिलकर वह इसे हटाने के लिए आंदोलन करेंगे। इस दौरान हर्षर्द्धन और टीपू सुल्तान की तस्वीर पर काले रंग का स्प्रे कर उनके पोस्टर जलाए गए। बताते हैं कि बीते शनिवार को पर्वती पुलिस स्टेशन में इस मामले में मुकदमा भी दर्ज कराया गया है।
समझ में नहीं आता कि एक तरफ राहुल गांधी पार्टी को मजबूत करने के लिए रात दिन संघर्ष कर रहे हैं और दूसरी तरफ उनकी पार्टी के नेता महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष हर्षवर्द्धन जैसे लोग नित नए विवाद खड़े करने में लगे हैं। आखिर इसके पीछे माजरा क्या है इस पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रमुख नेताओं को ध्यान देना होगा। क्योंकि इस पार्टी के कुछ नेताओं के बिगड़े बोल के चलते महाराष्ट्र सहित सभी विधानसभाओं में क्या स्थिति है यह किसी को बताने की आवश्यकता नहीं है। मुझे लगता है कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी व सोनिया गांधी आदि को अगर देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस जिसके आजादी में दिए योगदान को भुलाया नहीं जा सकता को हर्षवर्द्धन जैसे नेताओं की जबान पर लगाम नहीं लगाई या उन्हें्र बाहर का रास्ता नहीं दिखाया तो जैसे राजनीतिक क्षेत्रों में चर्चा के अनुसार पहले दलित फिर मुसलमान छिटके और अब ब्राहमण भी लगभग दूर ही है। अब ऐसा ही चला तो वफादार कार्यकर्ता भी वीर पुरूषों का अपमान होता देख कांग्रेस छोड़ सकते हैं ऐसे में राहुल जी यह किसी को बताने की आवश्यकता नहीं है कि आप जो जनाधार इकटठा कर रहे हैं वो कब मुटठी से रेत के समान खिसक जाए यह कोई नहीं बता सकता। देश का आम आदमी जो किसी दल से जुड़ा नहीं है वोट देने का निर्णय लेता है वो चाहता है कि गांव से लेकर केंद्र तक सत्ताधारी दल के साथ साथ विपक्ष भी मजबूत हो। यह तभी हो सकता है जब राहुल जी आपके नेता बोलने से पहले दस बार सोचें।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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