नई दिल्ली, 17 मार्च (भा)। चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्ष के सांसद चुनाव आयोग पर भाजपा के इशारे पर तारीखों के ऐलान का आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि चुनावी तारीखें और चरण भाजपा की सहूलियत के हिसाब से बनते हैं। चुनाव आयोग की घोषणा निष्पक्ष नहीं है और इसमें सत्तारूढ़ दल की सुविधा को प्राथमिकता दी जा रही है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि केरल का चुनाव उनके लिए महत्वपूर्ण चुनौती है। उन्होंने कहा कि पिछली बार सीपीएम नेतृत्व वाली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सत्ता में लौटी थी, जबकि पिछले कई दशकों में सत्ता बारी-बारी से दो प्रमुख फ्रंट के बीच रही है। थरूर ने कहा कि कांग्रेस इस बार सरकार बदलने की पूरी कोशिश करेगी। उन्होंने उम्मीदवारों की घोषणा जल्द होने और अंतिम दो हफ्तों में प्रचार के लिए अपनी उपस्थिति कम होने की संभावना जताई। कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने कहा कि कांग्रेस और यूडीएफ पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ एलडीएफ सरकार ने राज्य का कुप्रबंधन किया और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया। कांग्रेस संगठनात्मक रूप से इस चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि अधिकारी अक्सर राज्य सरकारों से जुड़े होते हैं, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर असर पड़ता है। सांसद प्रमोद तिवारी ने भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भारतीय जनता पार्टी के लिए सुविधाजनक निर्णय करता है। सांसद उज्ज्वल रमन सिंह ने कहा कि यदि चुनाव निष्पक्ष होंगे तो हमारा अच्छा प्रदर्शन रहेगा। आयोग को निष्पक्ष चुनाव कराना चाहिए, अभी तक यह देखने को नहीं मिलता है, शायद अब दिखाई दे। समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने आम जनता की मुश्किलों की ओर ध्यान खींचते हुए कहा कि पहले नोटबंदी, फिर कोविड-19 और ऑक्सीजन की कमी के बाद अब गैस सिलेंडर की किल्लत लोगों के जीवन को प्रभावित कर रही है। वहीं, सपा सांसद राजीव राय ने लोकसभा अध्यक्ष के पत्र पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि स्पीकर के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करनी चाहिए।
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