बहराइच, 12 दिसंबर। बहराइच के हरदी थाने के महाराजगंज कस्बे में 13 अक्तूबर 2024 को दुर्गा प्रतिमा विर्सजन जुलूस में हुए बवाल और भड़की हिंसा में एक युवक राम गोपाल मिश्र की हत्या में दोषसिद्ध अभियुक्त सरफराज उर्फ रिंकू को मौत की सजा सुनाई गई है। नौ अन्य आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा हुई है। न्यायालय प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पवन कुमार शर्मा की अदालत ने यह फैसला सुनाया है।
हरदी थाने में दर्ज मामले में 13 आरोपी थे जिसमें अदालत ने तीन को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया। बाकी पर एक-एक लाख का जुर्माना भी ठोंका गया है। दरअसल बहराइच के महराजगंज बाजार में 13 अक्टूबर, 2024 को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन शोभायात्रा पर हमले की वारदात के बाद हिंसा भड़क उठी थी। इसी दौरान विसर्जन यात्रा में शामिल एक युवक रामगांव थाने के रेहुवा मंसूर निवासी युवक राम गोपाल मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मंगलवार को तीन आरोपियों खुर्शीद, शकील अहमद उर्फ बब्लू, मोहम्मद अफजाल उर्फ कल्लू को संदेह के आधार पर बरी किया गया था। दस पर दोषसिद्ध हुए थे। एडीजीसी क्रिमिनल प्रमोद सिंह ने बताया कि यह हत्या दुर्लभतम श्रेणी में थी। गुरुवार को जज ने सरफराज उर्फ रिंकू को सजा-ए- मौत सुनाई गई है।
रामगोपाल की शादी उसकी हत्या से करीब 85 दिन पहले रोली से मंदिर में लव मैरिज थी। शादी में बहुत कम लोग थे। शादी के बाद दोनों पक्षों के लोगों ने इस रिश्ते को मान लिया था। राम गोपाल पहले लखनऊ में रहता था। राम गोपाल के 4 भाई और दो बहन थे। दो भाइयों की पहले ही मौत हो चुकी है। एक ने फांसी लगा ली थी, दूसरे भाई की डूबने से मौत हुई थी। मौत के समय दोनों की उम्र 25 साल से कम थी। अब राम गोपाल मिश्रा की भी 25 साल से कम उम्र में मौत हो गई।
30-90 दिन में अपील दायर करने का अधिकार
दोषसिद्धि और सजा के फैसले के बाद, दोषी को अपील दायर करने का अधिकार होता है। अपील 30-90 दिनों के भीतर की जा सकती है, जिसमें सजा को कम करने, रद्द करने की मांग की जा सकती है। यदि फांसी की सजा हो तो पुष्टि आवश्यक है। पीड़ित पक्ष फांसी की मांग कर सकता है यदि आजीवन कारावास हो।

