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    समाज को जोड़ने व राष्ट्र की एकता हेतु मोहन भागवत का संघ परिवार के प्रमुख बने रहना है वक्त की मांग और स्वयंसेवकों की भावनाओं से भी जुड़ा है

    adminBy adminFebruary 9, 2026No Comments1 Views
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    जब से होश संभाला जब भी कहीं हिंदू और भारतीय की चर्चा हुई तो सर्वप्रथम नाम आरएसएस का सामने आया। वर्तमान में देश को निरंतर मजबूत करने सनातन धर्म को शक्ति देने और हर किसी में भारतीय देखने वाले संघ परिवार में आजकल अगल संघ प्रमुख कौन होगा को लेकर चर्चाएं व्याप्त हैं। वैसे तो इस समर्पित संगठन में सक्रिय हर आदमी गली मोहल्लों में काम कर रहा हो या राष्ट्रीय स्तर पर उसमें देश के लिए सोचने वाले मामलों में कोई कमी नजर नहीं आती है। इस हिंदूवादी संगठन आलोक जी और डॉ होसबोले, सरकार्यवाह डॉ कृष्णगोपाल जैसे अनेक लोग प्रमुख हैं जिन्हें किसी भी पद की गरिमा के अनुकूल काम करने में कोई कसर छोड़ने वाले नहीं है। वर्तमान में पड़ोसी देशों में जो स्थिति है और वहां हिंदूओं संग ज्यादती और उनकी हत्याएं हो रही हैं उनका विरोध करने और सरकार को इस मामले में संज्ञान लेने की ताकत देने में मोहन भागवत के नेतृत्व में काफी सहयोग मिल रहा है।
    वर्तमान समय में संघ परिवार के सौ वर्ष की यात्रा और अपने संघर्ष को घर घर तक पहुंचाने के लिए देश में डेढ़ लाख से ज्यादा कार्यक्रम हिंदूवाद को बढ़ावा देने और सबको साथ लेकर चलने की शिक्षा देने के लिए चल रहे हैं। फिलहाल जो कई मामलों में आम आदमी को बल देने का मुददा आता है तो अपने संबोधन में भागवत द्वारा नागरिकों को संदेश दिया जाता है। भागवत का कहना है कि सबकी सहमति से बनेगा अगला संघ प्रमुख। संघ कहेगा तो तुरंत पद छोड़ दूूंगा लेकिन जो भी सरसंघचालक बनेगा वह हिंदू ही होगा यह बात किसी को बताने की आवश्यकता नहीं कि संघ से नाम जुड़ते ही हर कोई हिंदू ही होता है। लेकिन मोहन भागवत द्वारा जिस प्रकार से पिछले कुछ सालों से आम आदमी को संघ से जोड़ने के प्रयास किए गए वो उल्लेखनीय है। देश को यह संदेश देने वाले ही सबकी सहमति और विश्वास में लेकर तैयार हो समान नागरिक संहिता ऐसा संदेश है जो सभी को इससे जोड़ने और विश्वास में लेने का प्रयास कह सकते हैं। अभी मुंबई में भागवत ने कहा कि सावरकर को भारत रत्न मिलता है तो पुरस्कार की प्रतिष्ठा और बढ़ेगी। कुछ साल पहले उन्होंने मुस्लिम गुरुओं को बुलाकर संघ के बारे में फेली गलतफहमी दूर करने का प्रयास किया था। और भी ऐसे अनेक किस्से हैं जो इस बात पर बल देते हैं कि उम्र की बाधा हटाकर संघ परिवार और देशहित में मोहनभागवत को ही अभी इस पद पर रहना चाहिए। मेरा संघ परिवार से कोई संबंध नहीं है मगर समाज में हो आम आदमी के बीच संघ को लेकर चर्चा होती है उससे जो विचार उभरकर आ रहे हैं वो भी इसी बात का समर्थन करते हैं कि अभी किसी ना किसी रुप में मोहन भागवत की संघ को आवश्यकता है। मैं जो सुना और मन में आया वो प्रस्तुत किया है बाकी १०० साल का वटवृक्ष बन गया संघ परिवार जो देश का सबसे पुराना राष्ट्रभक्तों का संगठन है और चाहे इमरजेंसी रही हो या कोई और दौर इसके कार्यकर्ता टूटे नहीं। बड़ी संख्या में जेल गए अंडरग्राउंड रहे और यातनाएं भी झेली। ऐसे देशहित की सोच रखने वाले संघ परिवार का मुखिया के पद पर फिलहाल मोहन भागवत जैसी सोच रखने वाले समग्र विचारों वाले व्यक्ति की जरुरत है। १०० साल पहले जब डॉ केशव बलिराम हेडगेवार ने इस संगठन की शुरुआत में जो उनकी सोच रही उस पर मेरी निगाह में भागवत सही उतरते हैं। देश में हर जगह स्वयंसेवक समाज के सहयोग से स्वास्थ्य शिक्षा स्वावलंबन जैसे विषयों पर कार्यक्रम चल रहे हैं ऐसे १.२९.००० कार्यक्रमों को भी बढ़ावा देने में संघ प्रमुख की भूमिका चल रही है। समाज को जोड़ों जो उनका अभियान है वो उल्लेखनीय कहा जा सकता है। भागवत जी का यह कहना कि ब्राहमण ही नहीं किसी भी जाति का बन सकता है संघ प्रमुख, उनकी अच्छी सोच और सबको साथ लेकर चलने की कार्यनीति उजागर होती है।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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