नई दिल्ली 07 मार्च। अमेरिका में Meta के खिलाफ एक मुकदमा दायर किया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कंपनी के स्मार्ट चश्मों से रिकॉर्ड की गई यूज़र्स की वीडियो क्लिप्स कुछ बाहरी कर्मचारियों द्वारा देखी जा रही थीं. इन वीडियो में कई लोगों के बेहद निजी पल भी शामिल थे. यह खबर सामने आने के बाद कई यूज़र्स ने कंपनी की प्राइवेसी पॉलिसी पर सवाल उठाए हैं और अमेरिका में कंपनी के खिलाफ मुकदमा भी ठोक दिया गया है।
हाल ही में स्वीडिश मीडिया की एक जांच रिपोर्ट सामने आई थी। इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि केन्या की एक थर्ड-पार्टी कंपनी के कर्मचारी मेटा स्मार्ट ग्लासेज से रिकॉर्ड किए गए वीडियो और तस्वीरों की समीक्षा कर रहे थे। हैरानी की बात यह है कि इन वीडियो में लोगों के बेहद निजी पल शामिल थे। जैसे- नहाते या टॉयलेट का इस्तेमाल करते समय के वीडियो, यौन गतिविधियों से जुड़े फुटेज और नग्नता से जुड़े दृश्य। मेटा का दावा है कि जब कर्मचारी इन वीडियो को देखते हैं तो लोगों के चेहरे धुंधले कर दिए जाते हैं ताकि उनकी पहचान न हो सके। लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह ब्लरिंग सिस्टम अक्सर ठीक से काम नहीं करता है। इस खुलासे के बाद यूके की डेटा प्राइवेसी रेगुलेटर संस्था ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है।
अमेरिका के न्यू जर्सी की रहने वाली जीना बार्टोन और कैलिफोर्निया के मेटो कानू ने ‘क्लार्कसन लॉ फर्म’ के जरिए मेटा और ग्लासेज बनाने वाली कंपनी लक्सोटिका पर मुकदमा दायर किया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मेटा ने अपने ग्लासेज को बेचते समय झूठे दावे किए। विज्ञापनों में कहा गया था, “डिजाइन्ड बाई प्राइवेसी, कंट्रोल्ड बाई यू” (प्राइवेसी के लिए डिजाइन किया गया, आपके कंट्रोल में), “बिल्ड फॉर योर प्राइवेसी” (आपकी प्राइवेसी के लिए बना)। इन दावों को देखकर ग्राहकों को लगा कि उनका डेटा पूरी तरह सेफ है। लेकिन कंपनी ने उन्हें यह साफ तौर पर नहीं बताया कि अगर वे एआई फीचर्स का इस्तेमाल करते हैं तो उनके डेटा को इंसान भी देख सकते हैं।
आरोपों पर मेटा ने क्या कहा?
मेटा ने इन आरोपों पर अपनी सफाई पेश करते हुए कहा है कि वह यूजर्स का डेटा चोरी-छिपे नहीं लेती है। कंपनी ने अपना काम करने का तरीका समझाया:
डेटा फोन में रहता है: स्मार्ट ग्लासेज से खींची गई फोटो या वीडियो तब तक आपके फोन में सुरक्षित रहते हैं जब तक आप खुद उन्हें कहीं शेयर न करें।
एआई के इस्तेमाल पर शेयर होता है डेटा: अगर आप अपनी फोटो या वीडियो पर ‘मेटा एआई’ का इस्तेमाल करते हैं तब वह डेटा मेटा के सर्वर पर जाता है।
सर्विस बेहतर करने के लिए रिव्यू: मेटा के मुताबिक, एआई को और स्मार्ट बनाने के लिए कुछ मामलों में इंसान इस डेटा को चेक करते हैं। कंपनी का कहना है कि यह बात उनकी ‘प्राइवेसी पॉलिसी’ में पहले से लिखी हुई है।

