संयुक्त परिवार यानि कुटुंब की परिभाषा समझाते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि एक छत और चारदीवारी में रहने से कुटुंब नहीं बनता। इसके लिए अपनेपन के भाव जरुरी है। हम इस परंपरा को निभा रहे हैं क्येांकि पश्चिम की तरह व्यक्ति को परिवार से ऊपर हमारे यहां नहीं रखा जाता। कुटुंब व्यवस्था सामाजिक परिवर्तन का आधार है। उन्होंने कहा कि परिवार की अगली पीढ़ी को संस्कारिक व पारिवारिक बनाने की पहली पाठशाला कुटुंब ही है।
शायद इसी भावना को ध्यान में रखते हुए मोहन भागवत द्वारा एक खबर के अनुसार कहा गया कि सभी दलों के कार्यकर्ताओं को संघ से जोड़ें। बीते रविवार को गोरखपुर के योगीराज गंभीर प्रेक्षागार में उन्होंने कहा कि संगठन के विस्तार के लिए स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन जरुरी है। वो सभी दलों के कार्यकर्ताओं को संघ से जोड़ने का प्रयास करते रहे क्येांकि राजनीतिक आधार पर विभाजन करने के बजाय समन्वय के साथ सबको साथ लेकर चलना चाहिए । उन्होंने कहा कि ऐसा करने के लिए किसी भी पार्टी के फ्रंटलाइन के नेताओं को नहीं उनके समर्थकों से दोस्ती बढ़ाना होगा। स्वयंसेवकों को सवर्ण अवर्ण के फेर मेें ना पड़ने की सलाह देते हुए कहा कि हिंदुत्व और अपनेपन के आधार से बिना किसी भेदभाव से सब जुड़ सकते हैं। यह किसी से छिपा नहीं है कि पिछले कई सालों से समाज को जोड़ने और सभी वर्गों को संघ के बारे में अवगत कराने के लिए मोहनभागवत के प्रयास किसी से छिपे नहीं है। उनका यह मत काफी अच्छा है क्योंकि इससे दूसरे दलों के कार्यकर्ता भाजपा को समर्थन भले ही ना करे लेकिन संघ की नीतियों को जानने का मौका मिलेगा। लेकिन संयुक्त परिवार की तरह सबको साथ जोड़ने की भावना से युक्त यह प्रयास कहीं अन्य राजनीतिक दलों को कार्यकर्ता विहीन ना बना दे इसका ध्यान विपक्षी नेताओं को रखकर अपने कार्यकर्ताओं को जोड़ने के लिए संवाद की नीति शुरु करनी होगी।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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