प्रयागराज में गंगा स्नान को लेकर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से उत्पन्न हुआ विवाद कम होने की बजाय बढ़ता ही जा रहा है। पूर्व में खबर पढ़ी कि उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। तो कांग्रेस द्वारा इसके खिलाफ प्रदर्शन किए गए। इस श्रृंखला में अब क्रांति सेना भी सड़कों पर उतर आई है। कांग्रेस और क्रांति सेना दोनों का कहना है कि यह शंकराचार्य को बदनाम किए जाने का प्रयास है। दूसरी तरफ प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मामले में यौन उत्पीड़न का मामला नाबालिग बच्चों के मेडिकल में साफ होने का दावा बीते बुधवार को यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रहमचारी के द्वारा किया गया। जो स्पष्ट है कि अब आरोप प्रत्यारोप और इस प्रकरण में राजनीतिक सामाजिक दलों के साथ साथ कुछ साधु संत भी सक्रिय हो गए हैं। जैसे जैसे यह मामला बढ़ रहा है उसमें जितना नजर आता है कम या ज्यादा कुछ साधु संत दलों में बंट गए हैं। कई शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में खड़े हैं तो कुछ दर्शक भी बन गए हैं।
वैसे तो यह अब बहुत उच्च स्तरीय मामला हो गया है मगर सनातन धर्म और धर्म में विश्वास रखने वाले धार्मिक प्रवृति के काफी लोगों का यह मानना है कि धर्म का मान सम्मान और गौरव व आस्था बनी रहे और सनातन धर्म के प्रति लोगों में विश्वास बढ़े इसके लिए सभी साधु संतों को एकजुट होना और सरकार को उनकी गरिमा कायम करनी चाहिए। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ जी खुद संत पुरुष हैं और धर्म में पूर्ण आस्था रखते हैं। इसलिए अगर कोई नाराजगी किसी तरह से हो गई है तो नागरिकों की भावनाओं का आदर करते हुए परिवार के मुखिया की भांति उन्हें इस मामले का निस्तारण कराकर उसे समाप्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। यह सभी जानते हैं कि इस प्रकार के विवाद किसी भी धर्म में उठे उसके अच्छे परिणाम तो नहीं होते नुकसान चाहे किसी भी पक्ष का हो मगर गरिमा धार्मिक भावनाओं और आस्था की प्रभावित होती है। इसे ध्यान में रखकर प्रमुख साधु संतों को भी मुख्यमंत्री से मिलकर इस बारे में चर्चा करते हुए इस प्रकरण का समापन सबके हित में कराने के लिए आगे आना वक्त की सबसे बड़ी मांग कही जा सकती है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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