बीमारी छोटी हो या बड़ी उसके इलाज के लिए दवाईयां और अन्य व्यवस्थाएं खोजे जाने हेतु दवा कंपनियां और वैज्ञानिक हर संभव प्रयास कर रहे हैं। इसलिए धीरे धीरे कठिन रोग के इलाज भी अब आसानी से होते नजर आ रहे हैं। लेकिन यह भी सही है कि अभी इनके पूर्ण इलाज की व्यवस्थाएं निश्चित तौर पर तैयार नहीं हुई है। लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि जो प्रयास इस मामले में हो रहे हैं धीरे धीरे उनके सकारात्मक परिणाम भी आने की चर्चाएं सुनाई देने लगी है। अभी हम अगर बात कैंसर की करें तो यह सही है कि एक समय था जब इसका इलाज संभव नहीं था और यह बीमारी जानलेवा समझी जाती थी। लेकिन पिछले कुछ सालों से कैंसर का इलाज कर रहे डॉक्टरों के प्रयासों से अब बड़ी संख्या में कैंसर का पता लगाने और इलाज करने की जो विधि विकसित हुई है उससे काफी बड़ी संख्या में कैंसर मरीज ठीक हो रहे है। इसलिए जागरूक नागरिकों से आग्रह है कि वो ऐसे प्रयास करें कि समाज में कोई भी व्यक्ति कैंसर के नाम पर हौव्वा ना खड़ा करे। कई मामलों में देखा कि किसी के कोई फुंसी निकली नहीं कि लोग चर्चा करने लगते हैं कि कहीं कैंसर तो नहीं हो गया। कई डॉक्टरों ने कैंसर की चर्चा करनी शुरू कर दी है। लेकिन हम बहुत आशावान और संयम से काम लेने वाले हेैं। कहा जाता है कि आशावादी लोग हर कठिनाई का सामना कर सकते हैं तो कैंसर के तो काफी मरीज अब ठीक हो रहे हैं और कई दशक से सामान्य जीवन जी रहे हैं जो इस बात का प्रतीक है कि इसके इलाज में सफलता मिल रही है। आंकड़े देखे जाएं तो कोरोना में कितने लोग मरे उन्हें कैंसर नहीं था। दुर्घटनाओं में काफी लोग मारे जाते हैं। कई लोगों का कहना है कि इतने लोग कैंसर से नहीं मरते जितने अन्य बीमारी और दुर्घटना में मारे जाते हैं। जब भी दुर्घटना में लोगों की मौत की खबर सुनते हैं तो भगवान की ऐसी ही मर्जी थी कहकर अपने मन को सांत्वना देते हैं तो फिर कैंसर के नाम पर इतना हौव्वा क्यों। किसी को पता चले तो उसके स्तर का पता लगाया जाए और फिर सलाह की जाए कि बचने की कितने प्रतिशत गुंजाइश है तो फिर हम कैंसर को लेकर चर्चा करते हैं तो उससे किसी प्रकार के हौव्वा फैलने की संभावना समाप्त हो जाती है। अब तो हर जिले में कई कई कैंसर सेंटर खुल गए हैं। डॉक्टर इलाज की सुविधा दे रहे हैं। उमंग मित्तल जैसे कैंसर रोग विशेषज्ञ भी उपलब्ध हैं। तो फिर मजबूत सोच और पक्के इरादों के साथ बीमारी के साथ यह सोचकर की मैं ठीक हो जाउंगा कम से कम मोल ली जाए। अब यह तो कह नहीं सकता कि किसी को दुख हो तो वह सोचे ही ना लेकिन सही इलाज के साथ ही यह सोचे कि मेरा ठीक होना तो पक्का है। कई बार यह सुनने को मिलता है कि आत्मबल और अटल इरादों से बीमारियां ठीक हो जाती हैं। तो परेशान होने या डर पैदा होने की बजाय अच्छे डॉक्टरों से सलाह लीजिए। सही तो तुम होकर रहोगे बस नकारात्मक ना सोंचे। सबका भगवान भला करेंगे यह पक्का है। होनी तो होनी होती है। जब तक जीवन है तो पूरे आत्मविश्वास से जीयो और परिवार को भी जीने दो बीमारी कैंसर हो या कोई और।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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