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    Home»देश»समुंद्र के नीचे बम छिपा रहा है ईरान
    देश

    समुंद्र के नीचे बम छिपा रहा है ईरान

    adminBy adminMarch 12, 2026No Comments3 Views
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    नई दिल्ली/दुबई, 12 मार्च (नभ)। अमेरिका ने दावा किया है कि वो होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की तरफ से माइंस बिछाने वाले जहाजों को नष्ट कर रहा है। अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने दावा किया है कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में कुछ नेवल माइन बिछाना शुरू कर दिया है। यह वह पतला पानी का रास्ता है जिससे दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा कच्चा तेल गुजरता है। अमेरिकी खुफिया स्रोत की जानकारी रखने वाले दो लोगों के मुताबिक माइनिंग की कोशिश अब तक लिमिटेड लगती है और हाल के दिनों में कुछ दर्जन माइन ही लगाई गई हैं।
    ईरान ने कई छोटे जहाज सिर्फ माइंस लगाने के लिए बना रखे हैं। जिसका मतलब है कि ईरान कुछ दिनों में ही सैकड़ों माइंस लगातर होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर सकता है। इससे होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का गुजरना पूरी तरह से बंद हो सकता है। माइंस लगने से फारस की खाड़ी में कमर्शियल शिपिंग में रुकावट आ सकती है।
    ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स, जो ईरान सरकार की नौसेना के साथ मिलकर काम करती है वो इस स्ट्रेट के ज्यादातर हिस्से को कंट्रोल करती है। मिलिट्री एनालिस्ट का मानना है कि माइन बिछाने वाले क्राफ्ट, एक्सप्लोसिव नावों और कोस्टल मिसाइल सिस्टम का फैला हुआ नेटवर्क बहुत आसानी से माइंस बिछाने की काबिलियत रखती है।
    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरान की स्ट्रेट में माइनिंग की कोई भी कोशिश का गंभीर अंजाम होगा। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा है कि श्अगर ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में कोई माइन लगाई है और हमारे पास उनके ऐसा करने की कोई रिपोर्ट नहीं है तो हम चाहते हैं कि उन्हें तुरंत हटा दिया जाए। उन्होंने कहा कि अगर किसी वजह से माइंस लगाई गई थीं और उन्हें तुरंत नहीं हटाया गया तो ईरान के लिए मिलिट्री नतीजे पहले कभी नहीं देखे गए लेवल के होंगे। उन्होंने आगे लिखा है कि श्दूसरी तरफ अगर वे जो लगाया गया है उसे हटा देते हैं तो यह सही दिशा में एक बड़ा कदम होगा!
    पानी के अंदर कितने तरह के माइंस लगाए जाते हैं?
    नेवल माइंस क्या होते हैं?: पानी के नीचे माइंस बिछाना। ये विस्फोटक डिवाइस होते हैं और अगर कोई जहाज इनसे पानी में टकराता है तो भयानक धमाके के साथ उस जहाज के चिथड़े उड़ जाएंगे। इन्हें आम तौर पर तंग पानी के रास्तों और शिपिंग लेन में लगाया जाता है ताकि आर्थिक रास्तों में रुकावट आए।
    लिम्पेट माइंस क्या होते हैं?: लिम्पेट माइंस भी विस्फोटक ही होते हैं। जिन्हें ड्राइवर जहाज के हल से जोड़ते हैं और इनका नाम शेलफिश के नाम पर रखा गया है जो चट्टानों से कसकर चिपकी रहती हैं। एक बार जुड़ने के बाद इन डिवाइस में एक फ्यूज होता है जो देर से धमाका करता है। इन माइंस में छोटे एक्सप्लोसिव चार्ज होते हैं और इनका इस्तेमाल जहाजों को डुबाने के बजाय उन्हें रोकने के लिए किया जाता है।
    इन्फ्लुएंस माइंस क्या होते हैं?: इन्फ्लुएंस माइंस भी एक तरह के विस्फोटक ही होते हैं जो सिग्नल से ट्रिगर होते हैं और गुजरते हुए जहाजों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। कुछ को जहाज के प्रोपेलर की आवाज का पता लगाने के लिए डिजाइन किया गया है, जिन्हें अकूस्टिक माइंस कहा जाता है। दूसरे जहाजों के बड़े मेटल हल की वजह से मैग्नेटिक फील्ड में होने वाले बदलावों पर ये प्रतिक्रिया करते हैं। कुछ मामलों में ये भी देखा गया है कि माइंस ऊपर से गुजरते हुए जहाजों से पैदा होने वाले प्रेशर में बदलाव आने पर धमाका करते हैं।
    मूर्ड माइंस: ये ऐसे विस्फोटक होते हैं जो समुद्र तल से जुड़े होते हैं और पानी के अंदर एक तय गहराई पर तैरते रहते हैं। इनका इस्तेमाल आम तौर पर तंग पानी के रास्तों और चोकपॉइंट को रोकने के लिए किया जाता है और जब जहाज इनसे टकराते हैं तो इनमें धमाका होता है।
    बॉटम माइंस: इस विस्फोटक को समुद्र तल में रखे होते हैं और अपने ऊपर से जहाजों का पता लगाने के लिए सिर्फ सेंसर पर निर्भर रहते हैं। ये सेंसर भूकंप के वाइब्रेशन, आवाज, मैग्नेटिक सिग्नल या प्रेशर में बदलाव को माप सकते हैं। जब कोई जहाज ऊपर से गुजरता है तो माइन फट जाती है। बॉटम माइंस में अक्सर तैरने वाले टाइप के एक्सप्लोसिव की तुलना में बहुत बड़े चार्ज होते हैं कभी-कभी सैकड़ों किलोग्राम तक विस्फोटक होते हैं। ताकि धमाका इतना शक्तिशाली हो कि जहाज को नुकसान पहुंचे।
    ईरान को लेकर कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ये खुद ही माइंस बनाता है। इसने कई वर्षों से इस तरह की युद्ध की तैयारी कर रखी है इसलिए कई तरह के माइंस ईरान के पास मौजूद हैं। कुछ माइंस जो ईरान के पास हैं वो काफी ज्यादा एडवांस हैं और माना जाता है कि उन्हें ईरान ने चीन, रूस या उत्तर कोरिया की मदद से डिजाइन किए हैं। कोविड संकट से पहले सेंटर फॉर इंटरनेशनल मैरीटाइम सिक्योरिटी ने अंदाजा लगाया था कि ईरान के पास 2000 से 5000 माइंस हो सकते हैं। 2026 में ईरान के पास कितनी माइंस हैं इसका अंदाजा नहीं है।

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