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    मृतकों के साथ परिजनों के रहने की घटनाएं समाज के लिए हैं घातक, आसपड़ोस के लोग शुरु करे जानकारी रखना और मृतका के पिता की कराई जाए मानसिक जांच

    adminBy adminApril 11, 2026No Comments9 Views
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    भाई की लाश के साथ रहा १५ दिन। मृत बेटी की लाश पर परफ्यूम छिड़कता रहा पिता इन हेडिंग की दो खबर पढ़कर पता चला कि सदर बाजार के तेली मोहल्ला में सितंबर २०२५ में बेटी की मौत के बाद अंतिम संस्कार करने की जगह आरोपी पिता दुर्गंध दबाने के लिए तीन माह तक लाश पर पर परफ्यूम छिड़कता रहा। बीते दिसंबर में कंकाल को मकान में बंदकर आरोपी पिता देहरादून फरार हो गया। गत दिवस जिसे परिवार के लोगों ने ही भैंसाली डिपो पर कुछ रिक्शा चालको के साथ देखा और उसे घर लेकर पहुंचे और घर खुलवाया तो दिल दहलाने वाली घटना सामने आई। बतादें कि उदयभानु विश्वास शिक्षा विभाग से रिटायर्ड है। इनकी पत्नी शर्मिष्ठा ने फांसी लगाकर जान दे दी थी। आजकल वो अपनी ३२ साल की अविवाहित बेटी के साथ रह रहा था। दूसरी घटना में शास्त्रीनगर में १२ साल पहले २०१४ में ऐसी ही घटना हुई थी जिसमें १५ दिन भाई की लाश मकान में रखकर छोटा भाई सोता रहा था। पहले तो ऐसी घटनाएं कम सुनने को मिलती थी क्योंकि मृतक के साथ रह पाना संभव नहीं होता। क्योंकि कुछ समय बाद शव से निकलने वाली दुर्गध पड़ोसियां को भी परेशान कर देती है। ऐसे में १२ दिन या ३ माह भले ही अपना कितना ही प्रियजन क्यों ना हो मौत के बाद उसके साथ रहना आम आदमी के लिए संभव नहीं है। यह जरुर सुनते हैं कि कुछ तांत्रिक या विक्षिप्त मानसिकता के लोग ऐसा कर सकते हैं ऐसे मामलों को ध्यान में रखते हुए शासन प्रशासन पुलिस व समाज के लोगों को उदयभानु की मानसिक जांच करानी चाहिए और १२ साल पहले जो भाई मृतक के साथ रहा उसकी फाइल खुलवाकर देखा जाना चाहिए कि ऐसा क्यों हुआ। ऐसे मामलों में आसपास के लोगों को कई कठिनाई और बीमारी होने से इनकार नहीं कर सकते। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए खासकर समाजसेवा में लगे लोगों को अपने आसपास का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। और अगर कोई व्यक्ति बाहर नहीं गया है और कई दिन तक नजर नहीं आता तो पुलिस को लेकर खोज खबर जरुर की जानी चाहिए और कोशिश हो कि ऐसी घटनाएं ना हो पाएं।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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