नई दिल्ली, 07 फरवरी। भारत सरकार देश का अपना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मॉडल तैयार कर रही है। देश के पहले सरकारी और देसी सॉवरेन एआई मॉडल, भारत जेनएआई के तहत बनने वाले टेक्स्ट आधारित एआई मॉडल का काम इसी महीने पूरा कर लिया जाएगा। यह जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में दी है। उन्होंने बताया कि यह एआई सिस्टम सिर्फ अंग्रेजी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हिंदी, तमिल, तेलुगु, बंगाली, मराठी, उर्दू सहित देश की सभी प्रमुख भाषाओं में लोगों से संवाद कर सकेगा। वहीं, इसी का बोलने और देखने की क्षमता वाला रूप स्पीच और विजन टेक्नोलॉजी से लैस होगा।
15 भाषाओं में पहले से विकसित किया जा चुका है
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत जेनएआई, इंडिया एआई मिशन के तहत विकसित किया जा रहा है और यह भारत का पहला राष्ट्रीय फाउंडेशनल लार्ज लैंग्वेज मॉडल होगा। इसे पूरी तरह भारतीय जरूरतों और सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भों के अनुसार डिजाइन किया गया है। प्रश्नकाल के दौरान उन्होंने बताया कि इस प्रोग्राम के तहत स्पीच (बोलने) और विजन (देखने) से जुड़ी एआई क्षमताएं पहले ही 15 भारतीय भाषाओं में तैयार की जा चुकी हैं। उन्हें आगे चरणबद्ध तरीके से और भाषाओं तक बढ़ाया जाएगा।
खेती, स्वास्थ्य और कानून में मिलेगा फायदा
सरकार के मुताबिक भारत जेनएआई का इस्तेमाल सिर्फ चौट या जानकारी देने तक सीमित नहीं रहेगा। इसका इस्तेमाल कृषि, आयुर्वेद, स्वास्थ्य सेवाओं और कानूनी सहायता जैसे क्षेत्रों में भी किया जाएगा, ताकि आम लोगों को सीधे फायदा मिल सके।
आईआईटी संस्थानों का राष्ट्रीय कंसोर्टियम
इस परियोजना का नेतृत्व आईआईटी बॉम्बे कर रहा है, जिसमें आईआईटी मद्रास, आईआईटी हैदराबाद, आईआईटी कानपुर, आईआईटी मंडी और आईआईटी इंदौर जैसे प्रमुख संस्थान शामिल हैं। सरकार ने इसे पूरे देश की साझी पहल बताया है। मंत्री ने बताया कि दुनिया के कई देशों में एआई मॉडल एक जैसी भाषा और संस्कृति वाले समाज के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन भारत जेनएआई को भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए हब और कंप्यूट सपोर्ट
सरकार के मुताबिक भारत जेनएआई के तीन मुख्य हिस्से हैं- टेक्स्ट, स्पीच और विजन। देशभर में 25 टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब बनाए गए हैं। एआई विकास के लिए जरूरी कंप्यूटिंग संसाधन जैसे कि जीपीयू और सर्वर आदि सब्सिडी दरों पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जा रही है।
1 लाख करोड़ से मिलेगा टेक्नोलॉजी को बल
सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपये का रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन फंड शुरू किया है, जिससे एआई और नई टेक्नोलॉजी के विकास को वित्तीय मदद मिलेगी। इसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। मंत्री ने साफ किया कि भारत जेनएआई सरकारी स्वामित्व वाला सॉवरेन सिस्टम होगा लेकिन यह आम लोगों, स्टार्टअप और संस्थानों के लिए खुला रहेगा। इसके इस्तेमाल, डेटा सुरक्षा और कीमत को लेकर नियम बनाए जा रहे हैं
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