लखनऊ 29 जनवरी। यूपी में अब जिला पंचायत अध्यक्ष अधिकारियों व कर्मचारियों का वेतन नहीं रोक सकेंगे। पंचायती राज विभाग की ओर से सभी जिला पंचायत अध्यक्षों को पत्र लिखकर वेतन न रोके जाने के सख्त निर्देश दिए हैं। लखनऊ व कौशांबी में वेतन रोके जाने के मामलों को लेकर शासन ने सख्त रूख अपनाया है। प्रमुख सचिव, पंचायती राज विभाग अनिल कुमार तृतीय की ओर से यह निर्देश जारी किए गए हैं।
लखनऊ सहित कई जिलों में जिला पंचायत अध्यक्षों द्वारा कार्मिकों का वेतन रोके जाने की शिकायतें लगातार शासन में हो रही थी जिसके बाद यह आदेश जारी किया गया है।
राजधानी में ही पिछले चार माह से अफसरों और कर्मचारियों का वेतन जिला पंचायत अध्यक्ष आरती रावत ने रोक रखा है। अधिकारियों ने शासन में इसकी शिकायत की थी। इसी तरह कौशांबी में भी जिला पंचायत कार्यालय में वेतन रोकने की शिकायतें शासन में की गईं।
अन्य कई जिलों में भी जिला पंचायत अध्यक्षों द्वारा किसी ने किसी बात पर वेतन रोकने की शिकायतें हैं। अपर मुख्य अधिकारी द्वारा वेतन और पेंशन भुगतान को स्वीकृत करने के बावजूद जिला पंचायत अध्यक्ष द्वारा अग्रसारित नहीं किया जाता है।
शासन ने स्पष्ट किया है कि अगर किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कोई आरोप या शिकायत है और कार्रवाई अपेक्षित है तो इस बारे में शासन को अवगत कराएं समय से कर्मचारियों का वेतन अथवा पेंशन का भुगतान नहीं किया जाना उत्तर प्रदेश जिला पंचायत तथा क्षेत्र पंचायत में बजट एवं सामान्य लेखा-1965 में विहित नियमों के प्रतिकूल है।
वेतन को अनुचित रूप से रोका जाना न केवल शासकीय कार्यों को प्रभावित करता है मानवीय रूप से भी उचित नही है। दरअसल जिला पंचायतों में अध्यक्ष और अफसरों के बीच खींचतान चल रही है, जिससे विकास कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। पंचायत चुनाव भी इसी वर्ष प्रस्तावित हैं और ऐसे में जिला पंचायत निधि से विकास कार्य नहीं होने से सरकार की छवि भी प्रभावित हो रही है।

