चाहे वाहन बीमा कहें या हेल्म बीमा या अन्य बीमे इन सबका उददेश्य जो था वो मुझे लगता है कि आवश्यकता पड़ने पर नागरिकों को थोड़ी थोड़ी राशि देने के बाद हुई सुविधा और समस्या का समाधान हो सके। इस मामलें में केंद्र व प्रदेश सरकारें भी आम आदमी का जीवन सुरक्षित करने के लिए समय से उसे चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए वाहन बीमा का लाभ मिल सके लेकिन देखने में आ रहा है कि कई कंपनियों के एजेंट घपला कर बीमा राशि की ज्यादा क्लेम लेने के लिए गलत तथ्यों के आधार पर धनराशि वसूल लेते हैं। जिसका कहीं ना कहीं उपभोक्ताओं को नुकसान होता है इस बात से कोई भी इनकार नहीं कर सकता। फिलहाल हम सरकार की कई निशुल्क चिकित्सा संबंधी योजनाओं के साथ ही हेल्थ इंशयोरेंस व औद्योगिक बीमे को देख सकते हैं। अस्पतालों में आयुष्मान योजना की बात है तो उसमें सबको को तो गलत नहीं कहा जा सकता लेकिन ज्यादातर फर्जी भर्ती दिखाकर या छोटी बीमारी में लाखों का क्लेम गलत तरीके से वसूल कर रहे हैं ऐसे अनेक मामले सामने आ चुके हैं। वाहन शोरूम संचालकों व बीमा एजेंटो के घपले भी सुनने को मिले हैं कि फलां ने वाहन पर टूटा फूटा सामान लगाकर मोटा क्लेम वसूल कर लिया। ऐसा करने वालेें कई अस्पताल व वाहन कंपनियों के शोरूम संचालकों की चर्चा खूब होती है। कोरोना काल में केएमसी और वर्तमान में शुभकामना हॉस्पिटल आदि के नाम खूब चर्चाओं में लिए जाते हैं। चर्चा है कि एक प्रकाशन कंपनी ने बरसात का पानी भर जाने के नाम पर हजारों के हुए नुकसान की एवज में करोड़ से ज्यादा मुआवजा वसूल लिया। संबंधित एजेंट को उसका दस प्रतिशत कमीशन देकर। कहने का मतलब सिर्फ इतना है कि सरकार जो जनता को लाभ पहुचाना चाहती है। कुछ कंपनियों के एजेंट व अस्पताल संचालक आदि घपला कर उसे हड़पने का मौका नहीं चूक रहे हैं। आए दिन मीडिया में मिलने वाली खबरों से पता चलता है कि लोग जो जीवन बीमा कराते हैं उसमें गड़बड़ी की इतनी गुुंजाइश नहीं है जितना वाहन हेल्थ व औद्योगिक संस्थानों के बीमे में मिलीभगत से होना सामने आ रहा है। सवाल उठता है कि जब ऐसे मामले सिद्ध भी हो जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ सही कार्रवाई ना होने से घोटाले बढ़ते ही जा रहे हैं। मेरा मानना है कि जनहित के इस काम में अगर कोई दोषी पाया जाता है तो बीमा एजेंट का लाइसेंस निरस्त हो और भविष्य में कहीं वो जनहित के काम में सक्रिय ना रह पाए तथा जिन वाहन शोरूम या अस्पतालों व औद्योगिक संस्थानों में फर्जी क्लेम वसूलने की बात सामने आए तो ऐसी व्यवस्था की जाए कि भविश्य में वो बीमा ना करा पाएं और जिस क्षेत्र में वह हैं उनके लाइसेंस निरस्त किए जाएं तो मुझे लगता है कि नागरिकों के हितों को डकार रहे लोगों की कार्यप्रणाली पर रोक लग सकती है और इसका लाभ बीमा कराने वाले लोगों को मिल सकता है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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