तमिलनाडु सहित दक्षिणी राज्यों के कुछ नेता कभी हिंदी को लेकर तो कभी प्रांतवाद आदि से संबंधित विवादित बोल बोलते रहे हैं। पिछले दिनों सनातन धर्म के बारे में जो शब्द उपयोग किए गए उसे लेकर देशभर में चर्चाएं हुईं। और अब तमिलनाडु के गवर्नर आरएन रवि ने विधानसभा में राष्ट्रगान का अपमान करने और अभिभाषण के दौरान माइक को बार बार बंद करने का आरोप लगाया और वो बिना भाषण दिए ही वहां से चले गए। इससे पहले भी राज्यपाल और सरकार के बीच टकराव की बात सामने आती रही। हर प्रदेश सरकार को संविधान के अनुसार कार्य करने और सरकार चलाने का अधिकार है लेकिन किसी को भी भाषा और राष्ट्रगान का अपमान करने या प्रांतवाद को बढ़ावा देने का कोई अधिकार नहीं है।
मैं किसी दल का नेता कार्यकर्ता तो हूं नहीं लेकिन फिर भी जब बात देश के सम्मान संविधान की परंपरा के उल्लंघन की आती है तो यह कहने से नहीं चूकने वाला कि दोषियों को कार्रवाई के दायरे में लाया जाए। चाहे वह कार्यकर्ता हो या मुख्यमंत्री। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं द्वारा ऐसे अपमान पर जो चुप्पी साधी जाती है वो ठीक नहीं है। राहुल गांधी जनमानस के नेता हैं। उन्हें अपनी पार्टी की नीति के अनुसार पीएम मोदी हो या सरकार सब पर सियासी निशाना साधने का अधिकार है। चाहे वह उद्योगपितयों को लेकर हो या किसी नेता को लेकर लेकिन राहुल जी संविधान का निर्माण आपके वंशजों के समय में हुआ। राष्ट्रगान भी उसी समय निर्धारित हुआ और प्रांतवाद फैलाने वालों की आलोचना तो हर व्यक्ति करता रहा है तो आप तमिलनाडु में जो हो रहा है तो देश की एकता को मजबूत करने और राष्ट्रगान का अपमान करने वालों के खिलाफ खुलकर क्यों नहीं बोल रहे। राहुल गांधी जी देश में आज भी कांग्रेस की विचारधारा के लोगों की कोई कमी नहीं है। इसी के परिणाम से आप विपक्ष के नेता के पद पर विराजमान है इसलिए आपको ऐसे मामलों में कोताही नहीं करनी चाहिए। क्योंकि इससे एक गलत संदेश जाता है और जो लोग कांग्रेस के साथ है उनके भी आपकी पार्टी से दूर होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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