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    जनप्रतिनिधि और एनजीओ सक्रिय हो जाएं तो देश में नकली उत्पादों का बाजार बंद और बिक्री खत्म हो सकती है, संबंधित विभागों की लापरवाही से हर क्षेत्र में उपभोक्ताओं का हो रहा है आर्थिक शोषण

    adminBy adminMarch 17, 2026No Comments6 Views
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    राष्ट्रभक्त संगठनों में शीर्ष पर आसीन संघ परिवार और पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा स्वदेशी की भावना हर नागरिक में पैदा करने और स्वदेशी का उत्पाद करने और उसे अपनाने के लिए आम आदमी को तैयार किया जा रहा है जिससे नागरिकों को रोजगार प्राप्त हो और देश का पैसा अपने यहां की उन्नति मेें ही लगाया जा सके। नागरिक इसे अपना भी रहे हैं लेकिन कुछ लालची प्रवृति के लोग विदेशी उत्पादों के नकली स्टीकर और मोहर लगाकर स्वदेशी बेच रहे हैँ या चोरी छिपे विदेशों से माल लाकर व्यापार कर रहे हैँ जो सरकार की स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की नीति का उल्लंघन है और आम आदमी का आर्थिक शोषण भी है। कुछ लोगों की विदेशी मानसिकता और कंपनियों के वस्त्र पहनने और सामान उपयोग करने की प्रवृति का भी लोग लाभ उठा रहे हैं जिस क्रम में एक खबर के अनुसार देश में नकली उत्पादों का बाजार बिकने वाली २८ फीसदी दवाओं, कपड़े खिलौने खाद्य सामग्री पर्स बाजार में उपलब्ध है। इसकी खपत का अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि ७४ फीसदी उपभोक्ताओं द्वारा कभी ना कभी नकली सामान खरीदने की बात स्वीकारी गई। बताते हैं कि इसका मुख्य प्लेटफार्म आनलाइन बाजार है मगर मुझे लगता है कि नकली उत्पाद जिनमें क्रीम पाउडर भी शामिल हैं कुछ बड़े लोगों की होड़ करने वाले सस्ती दरों में यह सामान खरीदकर अपने आप को अपडेट दिखाने की कोशिश करते हैं। नकली सामान की खपत का अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि ८९ फीसदी लोगों ने नकली उत्पाद खरीदें हैं। एक साल में ३५ फीसदी शहरी उपभोकत्ओं ने इसमें सहभागिता की और ५० फीसदी ग्राहक शिकायत भी करते हैं लेकिन जनप्रतिनिधियों की उदासीनता और अफसरों की लापरवाही या हर माह मिलने वाली उनका मुंह बंद रखती हैं। मेरा मानना है कि कुछ नागरिकों को सोसायटी बनाकर नकली सामान बनाने वालों के खिलाफ सघन अभियान चलाया जाए तो यह व्यवस्था रुक सकती है क्योंकि एनजीओ के लोग पता कर पुलिस प्रशासन के माध्यम से कार्रवाई के प्रयास करें तो पीएम मोदी का सपना साकार करने में मदद कर सकते हैं।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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