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    Home»देश»मंजू राय जैसे कानपुर नगर निगम से संबंध मामलों में दोषी अफसरों को बख्शा नहीं जाना चाहिए
    देश

    मंजू राय जैसे कानपुर नगर निगम से संबंध मामलों में दोषी अफसरों को बख्शा नहीं जाना चाहिए

    adminBy adminFebruary 25, 2026No Comments2 Views
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    1975 में सेवानिवृत हुए शिखरनाथ शुक्ला के परिवार को अंग्रेजी में लिखे नाम में आई और ई का अंतर आ जाने पर संवेदनहीनता का परिचय देते हुए नगर निगम कानपुर के अधिकारियों द्वारा उनके परिवार को फैमिली पेंशन देने में जो अड़ंगा अटकाया वो ४५ साल चक्कर लगाने के बाद हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से समाप्त हुआ। इस मामले ने कानपुर के अधिकायिों को फटकार लगाते हुए हाईकोर्ट ने एक सप्ताह में मामले के निस्तारण का आदेश दिया। शुक्ला के परिवार की महिला मंजू राय द्वारा फेमिली पेंशन पाने के लिए यह संघर्ष किया गया। हाईकोर्ट के फैसले से अब उन्हें तो न्याय मिल जाएगा लेकिन आई और ई के अंतर में इस मामले को फंसाकर ४५ साल तक कोर्ट के चक्कर लगाने के लिए मंजू राय को मजबूर करने वाले कानपुर नगर निगम के इस मामले से संबंधित अफसरों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि वर्तमान समय में अदालतों में मुकदमों की जो संख्या लंबित उसे लेकर हर स्तर पर चिंता जताई जा रही है। दूसरी तरफ कागजी खानापूर्ति और छोटी छोटी गलतियों पर पात्रों को परेशान करने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी अनेक विवाद उभरकर सामने आ जाएंगे जो कार्यालय में बैठकर एक शपथ पत्र लेकर भी निपटाए जा सकते थे। मुझे लगता है कि न्यायालय को इस प्रकार की व्यवस्था करनी चाहिए जो इस तरह के मामले पहली दूसरी सुनवाई में ही निस्तारित कर पात्रों को न्याय और मुकदमों की संख्या कम करने का महत्वपूर्ण काम कर सकते हैं। क्योंकि जब तक ऐेसे मामलों में जिम्मेदारों को सबक नहीं मिलेगा तब तक ऐसे ही मजबूर व्यक्ति परेशान होते रहेंगे क्येांकि ना तो हर व्यक्ति अदालत जा सकता है और ना ही उसमें ऐसी हिम्मत होती है। ढूंढा जाए तो कितने ही अफसरों के यहां चक्कर काटते ही बूढ़े हो जाते हैं और उन्हें न्याय नहीं मिल पाता जिसे ना सरकार की नीति कहा जा सकता है और ना ही कोर्ट की सहमति।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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