नई दिल्ली 01 जनवरी। नए साल से पहले ही गिग वर्कर्स की हड़ताल से कंपनियों को तगड़ा झटका लगा है. स्विगी, जोमैटो, अमेजन, फ्लिपकार्ट समेत सभी डिलीवरी वर्कर्स ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल की घोषणा की. गिग वर्कर्स की यूनियन का कहना है कि हमारी मांग के बावजूद कंपनियां उस पर गौर नहीं कर रही. कंपनियां न तो उन्हें ठीक वेतन देती है और न ही सुरक्षा की गारंटी. 10 मिनट की डिलीवरी वाला मॉडल सड़कों पर गिग वर्कर्स के लिए हादसों की वजह बन रहा है. धूप, ठंड और बारिश के बीच दिन-रात डिलीवरी के बाद कंपनी की तरफ से बीमा या हेल्थ इंश्योरेंस जैसी सुविधाएं नहीं मिलतीं. हालांकि, बुधवार को हड़ताल शुरू करने के बाद कंपनियों ने डिलीवरी कर्मचारियों के इंसेंटिव अमाउंट को बढ़ाने का ऐलान किया.
जोमेटो ने 150 रुपए प्रति ऑर्डर देने की बात कही है. वहीं व्यस्त समय में उन्हें जुर्माने से भी छूट दी है. इतना ही नहीं, स्विगी ने 31 दिसम्बर और 1 जनवरी को डिलीवरी कर्मियों को 10 हजार रुपए तक की कमाई का मौका दिया है. न्यू ईयर ईव पर पीक ऑवर्स (शाम 6 से रात 12 बजे) में ₹2,000 तक कमाई कर सकते हैं।
गिग वर्कर्स ऐसे कर्मचारी होते हैं जो स्थायी नहीं होते. इन्हें काम के आधार पर वेतन मिलता है. आसान भाषा में समझें तो जितना काम, उतना वेतन. जैसे- एक दिन की फूड डिलीवरी के बाद मिलने वाला वेतन या एक फ्रीलांस करने वाला कर्मचारी. इनका भुगतान फिक्स नहीं होता, यह उनके काम के मुताबिक घटता-बढ़ता है. Zomato, Swiggy, Blinkit डिलीवरी ब्वॉय गिग वर्कर्स का उदाहरण हैं.
श्रम और रोजगार मंत्रालय के मुताबिक, ऐसा व्यक्ति जो पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध से बाहर रहकर काम करता है या उनके बिजनेस में भाग लेता है और उससे कमाई करता है, वो गिग वर्कर कहलाता है.
गिग इकॉनमी शब्द का प्रयोग 2009 में न्यू यॉर्कर की पूर्व संपादक टीना ब्राउन ने किया था. इसका उद्देश्य यह बताना था कि अर्थव्यवस्था में काम करने वाले लोग डिजिटल बाज़ारों के माध्यम से लेन-देन करते हुए किस प्रकार प्रोजेक्ट्स को अपनाते हैं.
द इकोनाॅमिस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा गिग वर्कर्स चीन में हैं. यहां इनकी संख्या 2 करोड़ है. रिपोर्ट में दावा किया गया है, चीन के पास गिग वर्कर्स भी इतनी ज्यादा संख्या है कि ये दूसरे देशों के लिए मुश्किल बढ़ा सकता है. ये आने वाले वर्षों में चीन की अर्थव्यवस्था और समाज को नया आकार देगा. जैसे-जैसे तकनीक, लेबर मार्केट को नया रूप दे रही है, चीन के गिग वर्कर्स दुनिया भर के देशों के लिए उदाहरण पेश कर सकते हैं. भारत में करीब 1 करोड़ गिग वर्कर्स हैं, वहीं मलेशिया में 12 लाख हैं.

