आज गरीब से लेकर अमीर तक और झोपड़ी से लेकर महलों तक में जो रंगीन टीवी नजर आ रहे हैं उनकी शुरुआत २८ फरवरी १९५४ को हुई जब अमेरिकी कंपनी आरसीए ने पहला टीवी बाजार में बेचा। उस समय मॉडल का नाम आरसीए सिटी १०० रखा गया। इसकी कीमत १ हजार डॉलर थी। मगर अब जो हम दुनियाभर की जानकारी और मनोरंजन का लुत्फ उठाते हैं उस समय ऐसा नहीं था क्येांकि शुरुआत में चौनल कम कार्यक्रम दिखाते थे क्योंकि वो टीवी जल्दी गरम होते थे। उस समय लकड़ी के भारी डिब्बे जैसे बॉक्स में टीवी आते थे वो बहुत मोटे और भारी होते थे। उसमें बिजली की भी काफी खपत होती थी। इसलिए शुरुआत में अमीरों के यहां ही यह टीवी दिखाई देते थे क्योंकि इन्हें खरीदना आम आदमी के बस में नहीं था। १९६० के दशक में कलर प्रसारण बढ़ने और टीवी चौनलों पर कार्यक्रमों की बढ़ोत्तरी से सुंदर और हल्के व जल्द गरम ना होने वाले टीवी का दौर शुरु हुआ। जो अब एलसीडी और स्मार्ट टीवी के रुप में नजर आने लगे हैं। मगर मुझे लगता है कि रंगीन टीवी के प्रचलन में सबसे ज्यादा बढ़ोत्तरी उस समय हुई टीवी चौनल पर रंगीन बनी रामायण देखने का लोगों में क्रेज बढ़ा। पहले पड़ोस में जाकर टीवी देखा करते थे और बाद में कम उत्साह से रंगीन टीवी खरीदने के प्रेरित किया। कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि ७२ साल में रंगीन टीवी के क्षेत्र में अभूतपूर्व क्रांति आई है और यह पहली बार २८ फरवरी को यह बाजार में आया था। ७२ साल बाद इसके स्थापना दिवस पर शायद ही देश में कोई घर हो जहां के लोग टीवी ना देखते हों। वो बात दूसरी है कि आज भी कुछ गरीब क्षेत्रों में लोग दुकानों पर लगे टीवी देखने के लिए समय निकालते हैं। देखते सब है यह पक्का कहा जा सकता है।
मजीठियां बोर्ड यूपी के पूर्व सदस्य सोशल मीडिया एसोसिएशन एसएमए के राष्ट्रीय महामंत्री अंकित बिश्नोइ का कहना है कि अभी टीवी की गुणवत्ता में सुधार होगा और इसकी कीमत आम आदमी की पहुंच में आ सकती है। उस समय कोई भी आदमी इससे वंचित नहीं रहेगा क्येांकि जिस तरह तकनीकी का विस्तार हो रहा है और एआई जैसी व्यवस्था बढ़ रही है उसी हिसाब से इस क्षेत्र में सुधार होंगे। सर्वप्रथम बाजार में टीवी लाने वाली कंपनी आरसीए के संस्थापकों को बधाई की उन्होंने दुनिया को ऐसी तकनीकी दी जिससे लोग मनोरंजन के मार्ग प्राप्त कर पाया। इसकी स्थापना दिवस के मौके पर चलचित्र प्रेमियों को बधाई।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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