जामनगर/ नजीबाबाद, 07 मई। जामनगर के गोसाबारा आरडीएक्स लैंडिंग के लगभग तीन दशक पुराने मामले में स्पेशल टाडा कोर्ट ने 12 आरोपियों को सजा सुनाई जबकि 17 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। यह मामला 1993 के मुंबई बम धमाकों से जुड़ा था और इसमें अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का हाथ था। इसका उद्देश्य बाबरी मस्जिद विध्वंस का बदला लेना था। सजा पाने वाले आरोपियों में बिजनौर के नजीबाबाद निवासी पांच आरोपी भी शामिल हैं।
विशेष लोक अभियोजक तुषार गोकानी ने बताया कि 1993 में मुंबई बम ब्लास्ट और देशविरोधी साजिश के तहत पोरबंदर के गोसाबारा बंदरगाह पर हथियार, विस्फोटक और गोला-बारूद की खेप उतारने से जुड़े मामले में अदालत ने सबूतों और गवाहों के आधार पर 10 आरोपियों को दोषी मानते हुए पांच-पांच साल की सजा सुनाई जबकि दो को सात-सात साल कैद हुई। इन पर हथियारों को उतारने, छिपाने और आगे पहुंचाने में भूमिका निभाने का आरोप था। गवाहों के बयान और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद विशेष न्यायाधीश आर पी मोगेरा की अदालत ने यह निर्णय सुनाया है। 1993 से 2018 तक चली जांच में 46 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और दाऊद इब्राहिम, टाइगर मेमन और अनीस इब्राहिम समेत 15 को फरार घोषित किया गया। सजा पाने वालों में उस्मान उमर कोरेजा, अली मोहम्मद उर्फ ममदु, हारुन एडम संघर वाधेर, अहमद इस्माइल ओलिया, आरिफ अब्दुल रहमान उर्फ आरिफ लंबू लखानी, लखमन हरदास अहीर वासरा, उमरमिया उर्फ मामूमिया इस्माइलियान अली पंजुमिया सैय्यद बुखारी के साथ नजीबााद के इस्तियाक अहमद, कादिर अहमद, इफ्तेकार मोहम्मद, मोहम्मद अयूब उर्फ अब्दुल कय्यूम अंसारी, मोहम्मद सलीम अली उर्फ सलीम कुत्ता शामिल हैं। इसमें सलीम कुत्ता और मामुमिया पंजुमिया को सात साल, बाकी को पांच-पांच साल कैद की सजा सुनाई गई। उधर, कादिर अपने नाम में थोड़े से बदलाव का फायदा उठाकर लंबे समय तक पुलिस से बचता रहा। स्थानीय इलाके में वह कदीर नाम से जाना जाता था, जबकि पुलिस रिकॉर्ड में उसका नाम कादिर दर्ज था।
19 साल मुंबई में रहा फिर नजीबाबाद आ गया कदीर
जांच के दौरान इस मामले का कनेक्शन नजीबाबाद क्षेत्र से जुड़ा मिला था। नजीबाबाद क्षेत्र के गांव कल्हेड़ी निवासी कदीर 19 साल मुंबई में रहा फिर वापस नजीबाबाद आ गया, लेकिन उसका आना जाना मुंबई, गुजरात में लगा रहा। उसके संपर्क दाऊद गैंग से बने रहे। कदीर को जुलाई 2017 में गुजरात एटीएस, यूपी एटीएस और नजीबाबाद पुलिस की संयुक्त टीम ने गांव कल्हेड़ी से गिरफ्तार किया था। उसे 1995 में उसे भगोड़ा घोषित किया गया था। अगस्त 2015 में इसकी तलाश में नजीबाबाद पहुंची गुजरात पुलिस एक अन्य वांछित गांव खाईखेड़ी निवासी इश्त्याक को गिरफ्तार कर ले गई थी।
यह था मामला
1993 में दाऊद इब्राहिम और टाइगर मेमन की साजिश के तहत, पाकिस्तान से गुजरात के गोसाबारा तट पर आडीएक्स, एके-47 राइफल उतारे गए थे, जिनका इस्तेमाल 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट में किया गया था। यह मामला 1993 में दर्ज किया गया और जांच 2018 तक चली, जिसके बाद ट्रायल शुरू हुआ। मामले में कुल 46 आरोपी थे, जिनमें से 11 की मौत हो चुकी है और 15 अभी फरार हैं।

