राज्य विद्युत अभियंता संघ ऊर्जा निगम को आत्मनिर्भर बनाने और एकीकरण की बात कर रहा है। दूसरी तरफ केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खटटर यूपी में बिजली निगमों की रेटिंग में सुधार की बात कर रहे हैं। उनके दावों अभियंता संघ की बात का मैं विरोध तो नहीं कर रहा लेकिन अगर सब लोग जो सुधार करने में सक्षम है शहरों व देहातों का खुद या अपने प्रतिनिधियों द्वारा सर्वे कर नागरिकों की राय जान ले तो मुझे लगता है कि जो दावे व प्रयास किए जा रहे हैं उनमें सुधार व लागू भी किए जा सकते हें लेकिन देश प्रदेश की राजधानियों में बैठकर अफसर के आंकड़ों के आधार पर दावों से आम आदमी का हित तो प्रभावित हो ही रहा है सरकार के प्लान भी लागू नहीं हो पा रहे हैं। केंद्र से लेकर जिलों तक बिजली विभाग के अधिकारी भी खूब दावे कर रहे हैं। इनके अनुसार अगर ५० प्रतिशत भी सुधार हो जाए तो वो आम आदमी के हित में एक बड़ी उपलब्धि और तोहफा कहा जा सकता है। गत दिवस इस सर्दी के पहली बारिश के शुरु होते ही जिस प्रकार बिजली ने रुलाना शुरू किया उससे नागरिक परेशान तो हो ही रहे हैं उनके उपकरण भी खराब हो रहे हैं। आज एक खबर मिली कि शहर के कई इलाको में १४ घंटों की बिजली कटौती से नागरिक परेशान है। एक दिन की बारिश में जो बिजली का हाल हुआ उससे ही जानकार और सुविधा उपलब्ध कराने में सक्षम व जनप्रतिनिधि आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं कि पावर सप्लाई और बिजली आपूर्ति का क्या हाल है। मेरा मानना है कि प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी को ऐसी बातें तभी पता चल सकती हैं जब सत्ता और विपक्ष के नेता और कार्यकर्ता अपने नेताओं या सोशल मीडिया से खबरें उन तक पहुंचाएं। सरकार क्योकि बिजली आपूर्ति में सुधार पर काफी पैसा खर्च कर रही है और बजट में इससे संबंधित उपकरण और लाइनों में सुधार के लिए काफी कुछ दिया जा रहा है उसके बावजूद उम्मीद के अनुकूल नागरिकों को यह सुविधाएं क्यों नहीं मिल पा रही है इसका स्थलीय निरीक्षण कर नागरिकों से संवाद कर एक रिपोर्ट पीएम सीएम व ऊर्जा मंत्री को भेजी जाए तो काफी राहत नागरिकों को मिल सकती है वरना कागजी आंकड़ें तैयार होते रहेंगे और नागरिक परेशान ही होते रहेंगे जैसा अब हो रहा है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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