बुलंदशहर, 28 जनवरी।जहांगीराबाद में विचलित करने वाली घटना सामने आई है। दाई द्वारा डिलीवरी के दौरान नवजात का शरीर दो हिस्सों में बंट गया। धड़ गर्भाशय से बाहर आ गया, जबकि नवजात का सिर गर्भाशय में फंसा रह गया। महिला की भी हालत बिगड़ती देख आशा और दाई मौके से फरार हो गईं।
परिजनों ने कहा कि जब तक नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक वे नवजात का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। गंभीर हालत में महिला को मेरठ रेफर किया है। पीड़ित परिवार ने दाई को नवजात की मौत का जिम्मेदार बताते हुए हंगामा किया। पुलिस ने दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर अवैध प्रसव केंद्र को सील कर दिया है।
थाना जहांगीराबाद क्षेत्र के गांव रूठा निवासी झम्मन ने पुलिस को दी तहरीर में बताया है कि उसकी पत्नी राजकुमारी को 25 जनवरी की सुबह रविवार को प्रसव पीड़ा हुई थी। झम्मन ने गांव की आशा कार्यकर्ता को सूचित किया। आरोप है कि आशा कार्यकर्ता ने सरकारी अस्पताल की एम्बुलेंस नहीं बुलाई, बल्कि अपनी जान-पहचान वाली एक महिला को बुलाया, जो जहांगीराबाद नई बस्ती की निवासी है और कथित तौर पर अवैध रूप से गर्भपात कराती है।आशा कार्यकर्ता और महिला ने मिलकर राजकुमारी का प्रसव कराने का प्रयास किया। आरोप है कि सामान्य स्थिति न होने के बावजूद उन्होंने जबरन प्रसव कराने की कोशिश की। जब वे सफल नहीं हुईं, तो उन्होंने कथित तौर पर बच्चे की स्थिति उल्टी बताकर जीवित नवजात की गर्दन काट दी। इससे बच्चे का आधा शरीर महिला के जननांग से बाहर आ गया, जबकि गर्दन महिला के पेट में ही रह गई। इस घटना के बाद महिला को गंभीर हालत में छोड़कर आशा कार्यकर्ता और दाई मौके से फरार हो गईं
गांव के लोग पीड़ित महिला को लेकर पहले बुलंदशहर के जिला अस्पताल गए, जहां से उसे मेरठ के लिए रेफर कर दिया गया। मेरठ मेडिकल अस्पताल में भी डॉक्टरों ने पहले महिला की गंभीर स्थिति देखकर भर्ती करने से मना कर दिया।गांव वालों के अनुरोध पर महिला को आखिरकार अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने गांव के लोगों के बयान दर्ज कर उसका उपचार शुरू किया। नवजात शिशु के दो हिस्सों में बंटे शव का पोस्टमार्टम 26 जनवरी की शाम मेरठ में किया गया।इस मामले में पीड़ित झम्मन की ओर से दाई व आशा कार्यकर्ता के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। वहीं सीएमओ के निर्देश पर स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आरोपी दाई के अवैध क्लीनिक को सील कर दिया है।
झम्मन के छोटे भाई संन्दीप ने बताया कि जब तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक वे नवजात शिशु का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
इस बारे में कोतवाली प्रभारी संजेश कुमार सिंह का कहना है कि अमरगढ़ चौकी इंचार्ज को पीड़ित परिवार के घर अंतिम संस्कार कराने के लिए भेजा गया है और आरोपियों के एक-एक परिजन को हिरासत में लिया गया है। मेरठ से पोस्टमार्टम रिपोर्ट मंगाकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

