नई दिल्ली 05 जून। फास्टैग के जरिए टोल वसूली में गड़बड़ियों की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। कई मामलों में वाहन टोल प्लाजा या एक्सप्रेसवे से गुजरा ही नहीं, फिर भी उसके फास्टैग वॉलेट से टोल शुल्क काट लिया गया। आंकड़े बताते हैं कि मार्च महीने में देशभर में ऐसे 2.62 लाख से अधिक मामले दर्ज हुए। खास बात यह है कि इनमें से 70 फीसदी मामलों में गलत तरीके से काटी गई राशि लौटाई गई।
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के अनुसार, कुल 2,62,108 चार्जबैक (धनवापसी) आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 1,84,544 मामलों में ग्राहकों की शिकायत सही पाई गई और धनराशि वापस कर दी गई। यानी करीब 70 प्रतिशत मामलों में टोल शुल्क गलत तरीके से काटा गया था।
उदाहरण के लिए, यदि वाहन एक्सप्रेसवे पर 50 किलोमीटर चला लेकिन टोल एजेंसी ने 120 किलोमीटर या उससे अधिक की यात्रा दिखाकर फॉस्टैग वॉलेट से टोल शुल्क काट लिया।
इसके लिए नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (एनईटीसी) प्रणाली में बैंकों के प्रदर्शन का आकलन किया जाता है। इसमें देखा जाता है कि टोल शुल्क गलत तरीके से काटे जाने या वापसी के लिए हर महीने कुल कितनी शिकायतें दर्ज की जा रही है।
बड़ी धन राशि वापस करने वालेे प्रमुख बैंक
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक 83,786 60,054
आईसीआईसीआई बैंक 59,315 28,768
कोटक मंहिद्रा बैंक 32,116 29,891
येस बैंक 36,763 29,619
क्या पुराना फास्टैग नई कार पर लगाया जा सकता है?
इसका जवाब है नहीं. फास्टैग सिर्फ एक वाहन के लिए जारी किया जाता है. यह वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर, चेसिस नंबर और व्हीकल कैटेगरी से जुड़ा होता है. इसलिए किसी दूसरी गाड़ी पर उसी फास्टैग का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. इसके अलावा फास्टैग स्टिकर के अंदर एक खास आरएफआईडी चिप लगी होती है. जब इसे विंडस्क्रीन से निकाला जाता है तो अक्सर यह खराब हो जाती है. ऐसे में टोल प्लाजा पर स्कैनर इसे पढ़ नहीं पाता और फास्टैग काम करना बंद कर देता है.
फास्टैग का बचा हुआ पैसा कहां जाएगा?
यह सवाल भी अक्सर लोगों के मन में रहता है. फास्टैग बंद होने के बाद उसमें मौजूद बचा हुआ बैलेंस और सिक्योरिटी डिपॉजिट आपके लिंक्ड बैंक अकाउंट में वापस कर दिया जाता है. आमतौर पर यह प्रक्रिया 7 से 10 कार्यदिवस के भीतर पूरी हो जाती है. इसलिए फास्टैग बंद कराने से पहले यह जरूर जांच लें कि आपका बैंक अकाउंट सही तरीके से लिंक है या नहीं.
नई गाड़ी के लिए नया फास्टैग कहां से मिलेगा?
नई कार खरीदने के बाद नया फास्टैग लेना बेहद आसान है. आप इसे बैंक की वेबसाइट, मोबाइल ऐप या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए घर बैठे मंगवा सकते हैं. इसके अलावा किसी भी नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा पर मौजूद अधिकृत काउंटर से भी नया फास्टैग लिया जा सकता है. इसके लिए आमतौर पर वाहन की आरसी, पहचान पत्र और एक फोटो की जरूरत पड़ती है.
भूलकर भी न करें ये गलती
कई लोग सोचते हैं कि फास्टैग में पैसा बचा हुआ है, इसलिए पुराना स्टिकर नई गाड़ी पर लगा देंगे. लेकिन ऐसा करना महंगा पड़ सकता है. अगर वाहन और फास्टैग की जानकारी मेल नहीं खाती तो सिस्टम इसे ब्लैकलिस्ट कर सकता है. ऐसी स्थिति में टोल प्लाजा पर आपको दोगुना टोल भी देना पड़ सकता है और बार-बार यात्रा में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

