पड़ोसी देश २०२५ में जेन जी का जो आंदोलन शुरु हुआ उसने इस देश के बड़े धुरंधरों को राजनीति की नई परिभाषा समझाने में देर नहीं की परिणमस्वरूप ज्यादातर पुराने नेता सत्ता से बाहर हो गए और जेन जी आंदोलन के बालेन शाह की पार्टी आरएसपी १२४ सीटें जीतकर इतिहास रचने में सफल रही और अब जेन जी नेता बालेन शाह का नेपाल का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय है। १६५ सीटों पर ३१३५ उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। इन पुराने दिग्गजों को साइड कर प्रधानमंत्री के पद तक पहुंचने वाले युवा बालेन शाह नई सोच और विचारों की राजनीति करेंगे यह बात कह सकते हैं।
भारत एक मजबूत राष्ट्र है इसलिए अच्छे रिश्तों की संभावनाएं तो बनी हुई है लेकिन पूर्व में कुछ मौकों पर बालेन शाह के जो बयान आ चुके हैं उन्हें भी ध्यान रखकर देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को समयानुकुल निर्णय लेने होंगे। क्योंकि जेन जी आंदोलन के इर्द गिर्द जो बयान आए और काठमांडू का मेयर रहते हुए २०२३ में उनके द्वारा जो अखंड नेपाल का नक्शा जारी किया गया इसमें हिमाचल और उत्तराखंड के कई इलाके नेपाल में दिखाए गए थे उसे भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। फिलहाल उन बातों को भूलकर हमारे देश ने नेपाल में उन्हें राजनीतिक बदलाव पर सकारात्मक सोच का परिचय दिया है।
मगर इस सबके बावजूद एक बात सबसे ज्यादा सोचने की यह है कि एक ही साल में जेन जी का आंदोलन पूरे नेपाल में भले ही १२४ सीटें जीत पाया हो उसकी उपस्थिति सकारात्मक रही है। यह ऐसा संदेश है कि सोशल मीडिया के सकारात्मक रुप को बढ़ाकर अगर सियासी दल जनता से जुड़कर उनकी समस्याओं का उन्मूलन नहीं करेंगे तो जेन जी को मिली इस उपलब्धि से उत्साहित होकर उथल पुथल वाले देशों में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। बालेन शाह अगर प्रधानमंत्री बनते हैं तो कमान संभालेंगे और युवा सोच के अनुसार काम किया तो पुराने दलों और उनके नेताओं को शांत बैठने या इस युवा पीएम को समर्थन देने के अलावा कुछ नहीं बचेगा। क्योंकि औली की कम्यूनिस्ट पार्टी अब ८ सीटों पर सिमट गई जो हमें इमरजेंसी के बाद भारत में हुए चुनाव में जो हालत कांग्रेस की हुई थी उसकी याद दिलाती है। फिलहाल बालेन शाह की युवा सोच नेपाल में कैसी क्रांति लाएगी यह देखना है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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