मेरठ 16 जुलाई (प्र)। शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट और सेटबैक प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब कार्रवाई का दायरा केवल बाजार तक सीमित नहीं रह गया है। आवास एवं विकास परिषद ने कार्रवाई के लिए कुल 446 आवासों को चिन्हित किया है। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, इनमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और निम्न आय वर्ग की योजनाओं के जरिए बने मकान शामिल हैं। फैसले के बाद सबसे अधिक चिंता उन परिवारों में है, जो वर्षों से इन मकानों में रह रहे हैं।
अभिलेखों के अनुसार, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) श्रेणी में कुल 328 आवासीय इकाइयां हैं। इनमें 24.56 वर्गमीटर के 176 प्लॉट, 25 वर्गमीटर के 68 प्लॉट, 40 वर्गमीटर के 41 प्लॉट और 40.92 वर्गमीटर के 43 प्लॉट शामिल हैं। प्लॉटों पर मकान बने हुए हैं और आवास एवं विकास परिषद की ओर से इन्हें भी चिन्हित किया गया है, जिन पर सेटबैक नियमों के जरिए कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
इसी प्रकार निम्न आय वर्ग (एलआईजी) श्रेणी में कुल 118 आवासीय इकाइयां हैं। इनमें 38.29 वर्गमीटर के 7 प्लॉट, 40.59 वर्गमीटर के 14 प्लॉट, 46.59 वर्गमीटर के 90 प्लॉट, 63 वर्गमीटर के 5 प्लॉट तथा एक अन्य श्रेणी के 2 प्लॉट शामिल हैं। इन सभी पर भी आवास निर्मित हैं और इन्हें भी परिषद की सूची में शामिल किया गया है। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद आए फैसले ने शास्त्रीनगर में नई चिंता पैदा कर दी है। अब केवल सेंट्रल मार्केट के व्यापारी ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में आवासीय परिवार भी अपने घरों के भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। लोगों का कहना है कि वर्षों पहले आवंटित योजनाओं में बने मकानों पर कार्रवाई की आशंका से पूरे क्षेत्र में बेचैनी का माहौल है।
सेटबैक कार्रवाई की तैयारी
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब आवास एवं विकास परिषद की अगली कार्रवाई पर सभी की नजर है चिन्हित मकानों के मालिकों में अनिश्चितता का माहौल है। लोगों का कहना है कि यदि सेटबैक को लेकर कार्रवाई शुरू होती है तो इसका सीधा असर सैकड़ों परिवारों पर पड़ेगा। ऐसे में सभी को परिषद और प्रशासन की अगली प्रक्रिया का इंतजार है। यह मामला अब केवल भवन नियमों तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि लोगों के घर और आजीविका से जुड़ा अहम मुद्दा बन गया है।
सुप्रीमकोर्ट के आदेशों के अनुसार होगी कार्रवाई
उप आवास आयुक्त अनिल सिंह ने कहा कि शास्त्री नगर के सेटबैंक प्रकरण में जो भी कार्रवाई होगी, वह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और आवास एवं विकास परिषद के नियमों के अनुरूप ही की जाएगी। उन्होंने बताया कि परिषद ने संबंधित भवनों का अभिलेखों के आधार पर चिन्हीकरण किया है। आगे की प्रक्रिया न्यायालय के निर्देशों के अनुसार तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि परिषद का उद्देश्य केवल न्यायालय के आदेशों का पालन करना है। यदि किसी स्तर पर संबंधित पक्षों को नियमानुसार अपना पक्ष रखने का अवसर मिलता है, तो पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में और पारदर्शिता के साथ पूरी की जाएगी।

