लखनऊ, 06 मार्च (नभ)। विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में उत्तर प्रदेश में सभी राजनीतिक दल जुट गए हैं। भाजपा ने चुनाव को लेकर एक नई टीम के साथ उतरने की तैयारी शुरू कर दी है। दरअसल, भारतीय जनता पार्टी लगातार तीसरी बार प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में क्षेत्रीय अध्यक्षों की भूमिका को अहम माना जा रहा है। पार्टी ने प्रदेश के क्षेत्रीय अध्यक्षों को बदलने की तैयारी शुरू की है। इसको लेकर तैयारियों को पूरा कराया जा रहा है।
भाजपा की ओर से यूपी को छह क्षेत्रों में बांटा गया है। यहां क्षेत्रीय अध्यक्षों की तैनाती की जाती है। इन अध्यक्षों के माध्यम से जिलाध्यक्षों के कामकाज पर नजर रखी जाती है। साथ ही, क्षेत्रीय अध्यक्ष के स्तर पर टिकट दावेदारों के अनुमोदन किए जाते हैं। ऐसे में क्षेत्रीय अध्यक्ष का पद अहम माना जाने लगा है। क्षेत्रीय अध्यक्ष पद में बदलाव की सुगबुगाहट के साथ ही दावेदारों की दौड़ भी शुरू हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के जिलों से लेकर क्षेत्र और प्रदेश संगठन में जल्द ही बड़े बदलाव दिखेंगे। यूपी चुनाव को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में अभी जिला इकाइयों के गठन की प्रक्रिया पूरा कराया जा रहा है। वहीं, पार्टी की ओर से सभी क्षेत्रीय अध्यक्षों को भी बदलने की तैयारी की जा रही है। प्रदेश स्तर पर संगठनात्मक बदलाव के साथ ही क्षेत्रीय अध्यक्षों के बदलाव का भी ऐलान संभव है।
दरअसल, क्षेत्रीय अध्यक्षों को लेकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक कई प्रकार की शिकायतें पहुंची हैं। चहेतों को बढ़ावा देने से लेकर निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा तक के मामलों के बाद पार्टी ने बदलाव की तैयारियां शुरू की हैं।
उत्तर प्रदेश में भाजपा का संगठन 1918 मंडलों, 98 संगठानात्मक जिलों और 6 क्षेत्रों में बंटा है। मंडल अध्यक्ष पद पर नामों का ऐलान लगभग हो चुका है। 70 से 75 मंडल अध्यक्षों के ऐलान होने बाकी हैं। वहीं, 98 में से 94 संगठनात्मक जिलों के जिलाध्यक्षों का नाम घोषित किया जा चुका है। इस प्रकार 4 जिलाध्यक्ष का नाम होना बचा हुआ है। इसमें वाराणसी, चंदौली, देवरिया और अंबेडकरनगर जिलाध्यक्ष शामिल हैं।
पर्यवेक्षकों के स्तर पर सभी जिला इकाइयों के गठन के लिए राय ली जा चुकी है। यह माना जा रहा है कि अगले दो दिनों में रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को सौंपी जाएगी। इसके बाद क्षेत्रीय स्तर पर बैठकों का सिलसिला जारी है।
यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इसमें जिलाध्यक्षों के साथ-साथ क्षेत्रीय अध्यक्ष भी अहम माने जाते हैं। जिला से क्षेत्र के माध्यम से ही प्रदेश नेतृत्व को टिकट दावेदारों के नामों की सूची भेजी जाती है। पिछले कुछ समय में क्षेत्रीय अध्यक्षों को विधान परिषद भेजे जाने की परंपरा शुरू हुई है। इसको लेकर क्षेत्रीय अध्यक्ष पद अहम हो गया है। छह क्षेत्रीय अध्यक्ष पद पर बदलाव की तैयारी के बीच कुर्सी बचाने की होड़ शुरू हो गई है। लखनऊ से दिल्ली तक संपर्क साधा जा रहा है। संघ के पदाधिकारियों तक से संपर्क किया जा रहा है।
दूसरी तरफ पार्टी नई टीम के साथ विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी में है। पार्टी किसी भी स्तर पर कार्यकर्ताओं को नाराज करने का जोखिम नहीं लेना चाहती है। ऐसे में दावेदारों को भी मंथन चल रहा है। माना जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी नई और जोश से भरी टीम के साथ चुनावी तैयारियों को तेज करेंगे।
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