लखनऊ, 06 फरवरी। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की ओर से गत दिवस सभी जिलों के डीएम को पत्र लिख कर प्राथमिक कक्षाओं में तत्काल मोबाइल फोन से पढ़ाई कराने जाने पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। गाजियाबाद में तीन बहनों के कोरियन लव गेम के चक्कर में आत्महत्या किए जाने के बाद मोबाइल की लत छुड़ाने के लिए यह आदेश जारी किया गया है।
उप्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता सिंह चौहान का कहना है कि विद्यार्थी मोबाइल के लती बन रहे हैं। प्राथमिक स्तर की कक्षाओं में पढ़ाई के लिए मोबाइल का उपयोग करने वाले बच्चे अनजान में कई खतरनाक मोबाइल गेम खेलने लगते हैं। इस घटना ने छोटे बच्चों के मोबाइल के लत पर बहस शुरू कर दी है। अब इस मामले पर उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग ने संज्ञान लिया है। इसको लेकर स्कूलों में पांचवीं तक के बच्चों को वॉट्सऐप के जरिए होमवर्क या असाइनमेंट देने पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने सभी जिलों के डीएम को पत्र लिखा है।
बबिता चौहान की ओर से लिखे गए पत्र में कहा गया है कि गाजियाबाद की घटना पूरे समाज और शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है। कोरोना काल में स्कूलों ने मजबूरी में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करवाई थी, लेकिन हालात सामान्य होने पर भी वॉट्सऐप ग्रुप पर होमवर्क और असाइनमेंट दिए जा रहे है। इससे बच्चों में मोबाइल की लत बढ़ रही है।
वर्तमान में सामान्य परिस्थितियां होने के बाद भी कई स्कूलों द्वारा बच्चों के होमवर्क, असाइनमेंट सहित अन्य शैक्षणिक गतिविधियां वाट्सएप ग्रुप या फिर अन्य डिजिटल माध्यमों से मोबाइल फोन पर भेजी जा रही है।
इससे बच्चों के हाथ में मोबाइल फोन रहता है। यह स्थिति चिंताजनक है। बच्चे मोबाइल फोन के प्रति मानसिक, भावनात्मक एवं व्यावहारिक रूप से निर्भर रहते हैं। जैसे ही बच्चों को मौका मिलता है, मोबाइल फोन पर गेम खेलना शुरू कर देते हैं। मोबाइल फोन पर अनियंत्रित गेमिंग, इंटरनेट मीडिया व अन्य अवांछनीय गतिविधियां बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य व सामाजिक संतुलन को बिगाड़ रही है। उन्होंने सभी डीएम को निर्देश दिए हैं कि अपने-अपने जिलों में कक्षा पांच तक के सभी शासकीय, सहायता प्राप्त एवं निजी स्कूलों में अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर मोबाइल फोन से होमवर्क, असाइनमेंट या फिर अन्य शैक्षणिक पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए। विद्यालयों में ही सभी शैक्षणिक कार्य पूरे कराए जाएं। यह ठोस कदम उठाने से गाजियाबाद जैसी घटनाओं पर रोक लग सकती है।
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