सेना में शामिल गोरखाओं की वीरता और साहस के चर्चे हमेशा ही होते रहे हैं। पूर्व में भारतीय सेना की सात गोरखा राइफल में अभी भी ३० हजार से अधिक गोरखा एक खबर के अनुसार कार्यरत है। हर बटालियन में अभी भी गोरखा सैनिकों की कमी नहीं है। इनका इतना बड़ा संख्या में सेना में भर्ती हुई होगी इसका अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि आज भी पांच से छह सौ करोड़ रुपये नेपाली गोरखाओं को पेंशन के दिए जाते हैं। आज खबर पढ़ी कि अग्निवीर योजना में नेपाली गोरखा के लिए रास्ते हुए बंद। सहील गलत तो सरकार और सेना जान सकती है लेकिन सूत्रों का कहना कि नेपाल में भारत विरोधी माहौल उसके लिए जिम्मेदार है और नेपाली गोरखाओं के लिए लिए सुरक्षा क्षेत्र में काम करने के अवसर मौजूद हैं। बताते हैं कि लंदन सहित तमाम शहरों में निजी सुरक्षा एजेंसियों में इनकी बड़ी मांग है जहां सेना से भी बेहतर पैकेज इन्हें मिलता है। बताते हैं कि अभी इससे संबंध जारी अधिसूचना में गोरखा की जगह सिर्फ भारतीय गोरखा का कॉलम रखा गया है। यह अधिसूचना जून से शुरु होने वाली भर्ती के लिए हैं। खबर यह भी है कि रुस यूक्रेन युद्ध के दौरान ही गोरखाओं को रुस की सेना में काम करने के काफी मौके मिले। ब्रिटेन की सेना में गोरखाओं की भर्ती जारी है। चर्चा है कि यही कारण हो सकता है कि अग्निवीर योजना से पहले भी गोरखाओं की सेना में भर्ती होने की दिलचस्पी कम होने लगी थी।
इस बात से तो इनकार नहीं किया जा सकता कि भारत में रह रहे गोरखा नौजवानों के लिए काफी बेहतर अवसर अब उपलब्ध है। जहां तक सेना की बात है तो इसमें तो यही कहा जा सकता है कि देशहित में जो भी सोचा जा रहा है वो अच्छा ही होगा। लेकिन गोरखाओं के पराक्रम को कम करके नहीं आंका जाना चाहिए। रक्षामंत्रालय को अगर लगता है कि अग्निवीर भर्ती में नेपाली गोरखाओं को दूर रखा जाए तो बात और है वरना जैसे अन्य देशों में इनकी सेवाएं ली जा रही है उसी प्रकार अपने देश में भी बनी रहे। इसे ध्यान रख नेपाल सरकार से कहा जाए कि वहां हो रही भारत विरोधी कार्यप्रणाली को रोका जाना चाहिए और फिर भी सरकार इस ओर ध्यान नहीं देती है तो हर निर्णय लिया जाना चाहिए। चाहे वह किसी को कितना ही प्रभावित क्यों न करता हो। देश सर्वोपरि है और रहेगा। मगर एक बार गोरखाओं की अग्निवीर भर्ती में मौजूदगी को लेकर विचार जरुर होना चाहिए क्योंकि नेपाल हिंदू राष्ट्र के रुप में ही अभी तक स्थापित रहा है और आगे भी हर बिंदु पर विचार विमर्श हो। यह सबसे जरुरी है। मुझे लगता है कि भारत विरोधी गतिविधियों की समाप्ति के लिए नेपाल में उन लाखों पूर्व सैनिकों को सक्रिय किया जाए जो अरबो हमसे रुपये पेंशन के रुप में प्राप्त कर रहे हैं और उनकी निष्ठा हमेंशा भारत के प्रति बनी रही है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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