लगता है कि देशभर में विकास और देहात से लेकर शहरों के सौंदर्यीकरण की बनाई जाने वाली सरकारी योजनाओं को लागू करने और नागरिकों को जाम से मुक्ति दिलाने का मन उच्च स्तर पर बना लिया गया है। अभी धीरे धीरे प्रयास हो रहे हों लेकिन जिस प्रकार से गुजरात के राजकोट नगर निगम द्वारा १४ अवैध बस्तियों को ध्वस्त करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है अगर ऐसा ही आगे चलता रहा तो कच्ची कॉलोनियां कटने और अवैध निर्माण होने बंद हो सकते हैं। क्योंकि इसमें लगे भूमाफिया और बिल्डर अपनी प्रव्ति बदल सकते हैं क्योंकि ध्वस्तीकरण के डर से लोग मकान खरीदेंगे ही नहीं तो यह बनाकर क्या करेंगे। पिछले साल दिल्ली में भी कई अवैध निर्माण तोड़े गए और अब गुजरात में यह अभियान शु़रु हुआ है। मगर जब तक सरकार और नेता तथा अफसर इन अवैध कॉलोंनियों बिजली पानी का कनेक्शन देना बंद करने के साथ ही रजिस्ट्री पर रोक नहीं लगाएंगे तब तक सरकारी नीतियों के खिलाफ बनने वाले निर्माण और कॉलोनियां शायद रुकने वाली नहीं है। मैंने देखा कि अवैध निर्माणों के लिए जितने लोग दोषी हैं उतने ही अधिकारी दोषी हैं। अदालतें भी कई बार इस बारे में फैसले दे चुकी हैं। मंत्री और नेता भी ऐसा कहते रहे हैं लेकिन अब कथनी की नहीं करने की जरुरत है इसलिए लिए अधिकारियों को भी सजा देते हुए जेल भेजने की जरुरत है। यह मांग जनता में भी उठने लगी है कि अवैध निर्माणो के साथ इसके लिए जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई हो। राजकोट में नगर निगम यह अभियान चला रहा है तो अन्य जगहों पर विकास प्राधिकरण नगर निगम पुलिस को यह अधिकार प्राप्त है तो वह मिलकर अवैध निर्माण रोकने का प्रयास क्यों नहीं करते। आम आदमी की यह बात सही है कि इन्हें दी जा रही सुविधाओं पर रोक लगाई जाए।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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