समाज में आ रही जागृति और सरकार द्वारा हर वर्ग को बढ़ावा देने की मुहिम से महाभारत के ब्रहनलला के वंशजों किन्नरों को अब सरकार और समाज में भागीदारी मिलना शुरु हो गया था लेकिन अब सरकार इन्हें काफी सुविधाएं देने की योजना भी बना रही है। मतदाता सूची में तीसरे जेंडर के रुप में भी इन्हें स्थान मिल रहा है इसलिए यह कह सकते हैंं कि किन्नर समाज अब उपेक्षित नहीं है।
बीते दिवस अलीगढ़ में विहिप एवं सनातनी किन्नर अखाड़े के तत्वावधान में महामंडलेश्वर पटटा अभिषेक हुआ जिसमें महामंडलेश्वर स्वामी कौशल्यानंद गिरी ( टीना मां ) ने कहा कि किन्नर समाज को बराबरी का स्थान मिलना चाहिए। हिंदुओं को दरवाजा खोलना पड़ेगा और किन्नरों को उनका सम्मान लौटाना पड़ेगा।
उन्होंने यूपी के सीएम योगी आदित्यानाथ से अलीगढ़ का नाम हरिगढ़ करने की मांग भी उठाई। तथा हर जिले में किन्नरों के लिए अलग समाधि स्थल बनाने की मांग की। समारोह में अलीगढ़ की आरती श्रीवास्तव, दिल्ली की मनचली शंकर नंद गिरी को महामंडलेश्वर व राजस्थान की यशवंती पाटीदार को महंत की उपाधि से विभूषित किया गया। टीना मां ने सभी को चादर ओढ़ाकर सनातन धर्म की सेवा के लिए प्रेरित किया।
किन्नर महामंडलेश्वर की कोई भी मांग अनुचित नहीं है क्योंकि जिस प्रकार से नवजात बच्चों को उनका आशीर्वाद दिलाना शुभ माना जाता है और इन्हें बुलाया जाता है। हर कोई इन्हें सम्मान के साथ दान दक्षिणा देने में गुरेज नहीं करता। किन्नर महामंडलेश्वर की सभी मांगों मैं समझता हूं कि जागरुक व्यक्ति विरोध नहीं करेगा लेकिन किन्नर मुखिया होने के चलते टीना मां को भी अपने समाज का सम्मान कायम रखने हेतु नकली किन्नरों जो लोगों से दुर्व्यवहार करते हैं उनसे जो समाज की आन बान प्रभावित हो रही है उसके लिए इन पर अंकुश लगाने का प्रयास करना होगा। वर्तमान में सडकों पर वाहन चालकों से पैसा मांगने और ट्रेनों में जो नकली किन्नरों द्वारा किया जाता है वो असहनीय हो जाता है। किन्नरों को सम्मान मिले जरुरी है मगर नकली पर रोक लगे।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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