नई दिल्ली, 23 फरवरी। निर्वाचन आयोग द्वारा कराए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद देश के नौ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाताओं की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि इन क्षेत्रों में कुल मतदाता संख्या एसआईआर से पहले 21.45 करोड़ थी, जो अब घटकर 19.75 करोड़ रह गई है। इस तरह कुल मिलाकर 7.9 प्रतिशत की कमी सामने आई है।
गत दिवस चुनाव आयोग ने छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गोवा, केरल और अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह की अंतिम मतदाता सूची जारी की। इसके साथ ही अब तक 12 में से 9 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में प्रक्रिया अभी जारी है।
ड्राफ्ट मतदाता सूची में कुल 19.33 करोड़ मतदाता दर्ज किए गए थे, जो एसआईआर से पहले की सूची की तुलना में 9.9 प्रतिशत कम थे। इसके बाद दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान कई नाम जोड़े गए, जिससे अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या बढ़कर 19.75 करोड़ हो गई। हालांकि यह ड्राफ्ट सूची से 2.2 प्रतिशत अधिक है, लेकिन एसआईआर से पहले की स्थिति के मुकाबले अब भी 7.9 प्रतिशत कम बनी हुई है। जो बिहार में पिछले वर्ष हुए एसआईआर से मेल खाता है। बिहार में भी ड्राफ्ट चरण में मतदाता सूची में 8.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी, जो अंतिम सूची आने तक घटकर 6 प्रतिशत रह गई थी।
अंडमान और निकोबार में मतदाता संख्या 16.9 प्रतिशत, गुजरात में 13.4 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ में 11.8 प्रतिशत घट गई। इसके विपरीत लक्षद्वीप, केरल और राजस्थान ऐसे क्षेत्र रहे, जहां मतदाता सूची में सबसे कम गिरावट देखी गई। लक्षद्वीप में केवल 0.4 प्रतिशत, केरल में 3.2 प्रतिशत और राजस्थान में 5.7 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
ड्राफ्ट और अंतिम सूची के बीच सभी राज्यों में एक जैसा बदलाव नहीं हुआ, जिसका असर राज्यों की आपसी रैंकिंग पर भी पड़ा है। केरल, जो ड्राफ्ट चरण में अधिक कटौती वाले राज्यों में शामिल था, अंतिम सूची में सबसे कम गिरावट वाले तीन राज्यों में पहुंच गया। दूसरी ओर मध्य प्रदेश और गोवा, जो पहले अपेक्षाकृत नीचे थे, अब अधिक कटौती वाले राज्यों की सूची में ऊपर आ गए हैं।
ड्राफ्ट और अंतिम सूची के बीच सबसे बड़ा सुधार केरल में देखने को मिला, जहां मतदाता संख्या में 5.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसके बाद अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में 4.7 प्रतिशत और पुडुचेरी में 2.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके उलट गोवा एकमात्र ऐसा राज्य रहा, जहां अंतिम सूची ड्राफ्ट से भी छोटी हो गई और वहां ड्राफ्ट के मुकाबले 2.5 प्रतिशत मतदाता और कम हो गए।
राज्यवार आंकड़ों में मध्य प्रदेश में अंतिम मतदाता सूची में 5.39 करोड़ नाम दर्ज किए गए हैं, जबकि ड्राफ्ट सूची में यह संख्या 5.31 करोड़ और एसआईआर से पहले 5.74 करोड़ थी। दावे और आपत्तियों के दौरान राज्य में 10.85 लाख नाम जोड़े गए और 2.36 लाख हटाए गए, जिससे ड्राफ्ट सूची की तुलना में करीब 8.5 लाख की बढ़ोतरी हुई।
राजस्थान में 200 में से 199 विधानसभा क्षेत्रों में एसआईआर पूरा हो चुका है। इन क्षेत्रों में अंतिम मतदाता संख्या 5.15 करोड़ दर्ज की गई, जो ड्राफ्ट सूची के 5.04 करोड़ से अधिक है, लेकिन एसआईआर से पहले की 5.46 करोड़ की संख्या से कम बनी हुई है। जयपुर में मतदाताओं की संख्या में 3.45 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
केरल में अंतिम मतदाता सूची में 2.69 करोड़ मतदाता शामिल हैं, जबकि ड्राफ्ट सूची में यह संख्या 2.54 करोड़ और एसआईआर से पहले 2.78 करोड़ थी। ड्राफ्ट और अंतिम सूची के बीच राज्य में 15.64 लाख नाम जोड़े गए और 53 हजार से अधिक हटाए गए, जिससे करीब 15.1 लाख की बढ़ोतरी हुई।
छत्तीसगढ़ में अंतिम मतदाता सूची में 1.87 करोड़ नाम दर्ज किए गए हैं, जो ड्राफ्ट सूची से थोड़ा अधिक लेकिन एसआईआर से पहले की 2.12 करोड़ की संख्या से काफी कम हैं। राज्य में ड्राफ्ट के बाद करीब 3.43 लाख नाम जोड़े गए और 1.08 लाख हटाए गए। दुर्ग जिले में मतदाताओं की संख्या में 2.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
गोवा में अंतिम मतदाता सूची में केवल 10.6 लाख नाम रह गए हैं, जबकि ड्राफ्ट सूची में यह संख्या 10.8 लाख और एसआईआर से पहले 11.9 लाख थी। यह इकलौता राज्य है, जहां दावे और आपत्तियों के दौरान नाम जोड़ने के बजाय अधिक नाम हटाए गए। इस चरण में राज्य में करीब 39 हजार नाम हटाए गए, जबकि केवल 12 हजार से कुछ अधिक नाम जोड़े जा सके।
अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में अंतिम मतदाता सूची में 2.58 लाख नाम दर्ज किए गए हैं, जबकि ड्राफ्ट सूची में यह संख्या 2.46 लाख और एसआईआर से पहले 3.10 लाख थी। ड्राफ्ट के बाद यहां करीब 11.6 हजार की शुद्ध बढ़ोतरी हुई।
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