लिसाड़ी गेट के किदवई नगर में कपड़ा व्यापारी के घर में लगी आग से छह जानें चली गई। पूर्व में भी ऐसी घटनाएं हो चुकी है और जिम्मेदार दो तीन दिन सक्रिय होकर शांत बैठे जाते हैं। छोटी गलियों में बड़े अवैध निर्माण होने से संकरापन भी इन मौतों का जिम्मेदार कहा जा सकता है क्योंकि आग की खबर मिलते ही मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड गलियों में आसानी से नहीं पहुंच पाई इतने उन्होंने अन्य प्रयास कर चार गाड़ियों से आग पर काबू पाया उतने यह तबाही हो चुकी थी। हमेशा कहा जाता है कि ऊपर वाले की मर्जी थी मगर अब ऐसे मामलों में ऊपरवाले की मर्जी कहकर संतोष नहीं किया जा सकता है। ऐसे मामलों के लिए भ्रष्ट सिस्टम का दोष है। भविष्य में ऐसी घटनाएं ना हो इसलिए उसे दूर कराने की जरुरत है। मुझे लगता है कि जनप्रतिनिधियों को अधिकारियों से मिलकर ऐसी घटनाओं को रुकवाने के लिए कार्रवाई का माहौल तैयार करना होगा क्योंकि सुख में सुमिरन करे तो दुख काहे को होए वाली कहावत को ध्यान में रखकर कुछ सख्त निर्णय पुलिस प्रशासन को लेने ही पड़ेंगे क्येांकि ऐसी घटनाओं से उत्पन्न जनता का गुस्सा पुलिस प्रशासन को ही झेलना पड़ता है। आम आदमी दुख व्यक्त कर संतोष कर लेता है। हम भी मृतकों की आत्मा की शांति की प्रार्थना कर दुखी परिवारों को ढांढस बंधा रहे हैं लेकिन अब शांति से बैठने की बजाय राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के दिखाए मार्ग पर चलते हुए ऐसी घटनाओं को रोकना वक्त की सबसे बड़ी मांग कही जा सकती है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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